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मेजा बांध की नहर में उतरी मशीनें

Machines landed in Meja Dam canal भीलवाड़ा जिले में मेजा बांध से सिंचाई के लिए सोमवार से पानी छोड़ने से पहले जल संसाधन विभाग ने क्षतिग्रस्त एवं मलबे व कीचड़ से अटी नहरों की सुध ली। नहरों की सफाई के लिए क्रेन, बुलडोजर व बड़ी संख्या में मजदूर उतारे।

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मेजा बांध की नहर

मेजा बांध की नहर

Machines landed in Meja Dam canal भीलवाड़ा जिले में मेजा बांध से सिंचाई के लिए सोमवार से पानी छोड़ने से पहले जल संसाधन विभाग ने क्षतिग्रस्त एवं मलबे व कीचड़ से अटी नहरों की सुध ली। नहरों की सफाई के लिए क्रेन, बुलडोजर व बड़ी संख्या में मजदूर उतारे। शहर के साथ ही जिले के विभिन्न स्थानों पर नहरों की सफाई का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू हुआ।

राजस्थान पत्रिका ने गुरुवार के अंक में भीलवाड़ा शहर के लिए आफत ना बन जाए मेजा बांध का पानी शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया। इसमें भीलवाड़ा शहर व जिले के कई हिस्सों से गुजर रही मेजा बांध की नहरों के खस्ताहाल बयां किए। इस पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने मेजा बांध की क्षतिग्रस्त नहरों की सुध ली व मरम्मत कार्य शुरू कराए।

पानी के साथ सिंचाई भी

एक दशक पूर्व तक मेजा बांध वस्त्रनगरी की मुख्यत: जीवन रेखा रही है। लेकिन चम्बल पेयजल परियोजना शुरू होने के बाद मेजा पर निर्भरता घट गई है। अभी मेजा वृहद सिंचाई परियोजना है। कुल भराव क्षमता 2968.2 एमसीएफटी है। इसकी दो नहरें हैं। इनमें एलएमसी करीब 36.4 किमी लम्बी है, जो मेजा, काकूखेड़ा, मालीखेड़ा, मांडल, आरजिया, चमनपुरा, कमालपुरा समेत 20 गांवों के 12600 एकड़ भूमि सिंचित करती है।

46000 एकड़ में होगी सिंचाई

आरएमसी नहर की लम्बाई 26 किमी है। यह नहर पुर, मालोला, पांसल, बिलिया, हलेड, सुवाणा, भोली, अगरपुरा, धूमडास आदि लगभग 30 गांवों के 33400 एकड़ भूमि को सिंचित करती है। इसी प्रकार दोनों नहरें लगभग 46000 एकड़ में सिंचाई करती है।

मेजा का जलस्तर 16.1 फीट

इस साल बांध मे 16.1 फीट (601.85 एमसीएफटी) पानी आया, जिसमें से 200 एमसीएफटी पानी पेयजल के लिए जलदाय विभाग ने आरक्षित कर रखा है। उपलब्ध पानी 401.85 एमसीएफटी से करीब 20 दिन नहरें चलेगी, जिससे लगभग 3700 हैँक्टेयर यानि 9139 एकड़ क्षेत्र में सिंचाई संभव हो सकेगी।

शहर में आ सकती है आफत

शहर में मेजा बांध की नहर का बड़ा हिस्सा बापूनगर, आजाद नगर व चन्द्रशेखर से गुजरता है। यहां कई हिस्सों में नहरें टूटी हुई है। कई स्थानों पर कचरे व मलबे का ढेर है। नहरों में कंटीले झाडि़यां व बबूल है। नहरों में पानी छोड़े जाने के दौरान शहर की कई कॉलोनियों में पानी घुस आने की आशंका है। जिले में भी मेजा बांध की नहरों को लेकर ग्रामीणों को शिकायतें है।

विभागीय स्तर पर प्रयास शुरू

जलसंसाधन विभाग के अधिशासी अभियंता सीएल कोली ने बताया कि मेजा बांध की बांई मुख्य नहर (मांडल) 20 नवम्बर व दांई नहर (पांसल) 22 नवम्बर से खोली जाएगी। नहरों की मरम्मत व रखरखाव के लिए सरकार से बजट मांगा है। अभी विभागीय स्तर पर क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत एवं सफाई शुरू की है। बड़ी संख्या में श्रमिकों के साथ ही जेसीबी, बुलडोजर, डम्पर लगाए हैं। नहरों में फैले कंटीली झाडियों व बम्बूल के पेड़ों को भी हटाया जा रहा है।