
Laziness is man's biggest enemy; there is no happiness or peace in the life of a careless person.
मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु उसका आलस्य है। जो व्यक्ति प्रमाद में डूबा रहता है, उसके जीवन में कभी सुख और सुकून नहीं आ सकता, क्योंकि वह किसी भी शुभ कार्य को प्रारंभ करने का साहस ही नहीं जुटा पाता। यह बात मुनि आदित्यसागर ने बुधवार को आरके कॉलोनी स्थित आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के सामने तरणताल परिसर में आयोजित धर्मसभा में कही।
मुनि ने कहा कि काल का कोई भरोसा नहीं है। हर जीव अपनी आयु कर्म का बंध लेकर आता है। मुनि ने आधुनिक तकनीक और आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते प्रभाव पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि एआई के अति-प्रयोग से मनुष्य की स्वयं सोचने की क्षमता समाप्त हो जाएगी और मौलिक लेखन की आदत भी छूट जाएगी।
आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेश गोधा ने बताया कि 17 से 19 जनवरी तक तीन दिवसीय भव्य 'भक्तामर विधान मंडल' का आयोजन किया जाएगा। धर्मसभा में विधान के पात्रों का चयन किया गया।
ध्वजारोहण: 17 जनवरी को विधान से पूर्व चांदबाई, नरेश, नितिन और पीयूष गोधा ध्वजारोहण करेंगे।
ट्रस्ट सचिव अजय बाकलीवाल ने बताया कि मुनि श्री ससंघ ने बुधवार शाम को तिलक नगर की ओर विहार कर मंदिर पहुंचे। वे वहां निर्माणाधीन मंदिर का अवलोकन करेंगे। इसके पश्चात मुनि 16 जनवरी की सुबह विहार करते हुए आरके कॉलोनी स्थित जैन मंदिर पहुंचेंगे, जहाँ भक्तों की ओर से उनकी अगवानी की जाएगी।
Published on:
15 Jan 2026 10:51 am
