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18 लाख का कर्जा था , सोशल मीडिया पर क्राइम सीन देख रची साजिश, मरने की झूठी कहानी बनाई और लापता हो गया

कोटड़ी क्षेत्र के जांवल में खेत जाने के बाद लापता हुए ई-मित्र संचालक नारायण जाट को आखिरकार एक सप्ताह बाद तलाशकर पुलिस छत्तीसगढ़ से भीलवाड़ा ले आई।

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Made a false story of death and went missing

कोटड़ी क्षेत्र के जांवल में खेत जाने के बाद लापता हुए ई-मित्र संचालक नारायण जाट को आखिरकार एक सप्ताह बाद तलाशकर पुलिस छत्तीसगढ़ से शुक्रवार को भीलवाड़ा ले आई। शेयर बाजार में पैसा डूब जाने के कारण नारायण पर 18 लाख रुपए का कर्जा था। लेनदारों से बचने के लिए उसने अपना शातिर दिमाग इस्तेमाल कर खुद के मरने की झूठी कहानी रची और लापता हो गया। खेत में उसने नीलगाय की हड्डियां जलाई और उसी के साथ अपना मोबाइल भी जला दिया। उसने सोशल मीडिया पर क्राइम सीन के विभिन्न वीडियो देखने के बाद उसने खुद के मरने की झूठी कहानी रची, ताकि लेनदार उसे मृत समझ लें और वह कहीं दूसरी शहर में नए सिरे से अपनी जिंदगी की शुरुआत कर सकें।

पुलिस अधीक्षक आदर्श सिधू ने शुक्रवार को पत्रकारों को बताया कि 17 दिसम्बर को नारायण पिता कान्हा जाट घर से खेत पर रखवाली करने गया। वहां से वह लापता हो गया। परिजन तलाशते हुए उसी दिन खेत पहुंचे, जहां बाहर अलाव जलता मिला और समीप राख का ढेर व कुछ दूर अफीम बिखरी मिली। राख में हड्डियां भी मिली। उसका टूटा मोबाइल भी वहीं पड़ा था। अनहोनी की आशंका पर कोटड़ी पुलिस ने राख और हड्डियों के ढेर देखते हुए अनुसंधान किया। नारायण की तलाश के लिए शाहपुरा एएसपी चंचल मिश्रा की अगुवाई में विशेष टीम का गठन किया था। टीम ने करीब 3500 किलो मीटर पीछा कर नारायण को छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में एक बस में यात्रा करते समय पकड़ लिया। उसे शुक्रवा को भीलवाड़ा लाया गया। उसने पुलिस को गुमराह किया। उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस कानूनी राय ली जा रही है।
चार साल पहले लगा शेयर बाजार में निवेश का शौक

पूछताछ में नारायण ने बताया कि चार साल पहले उसे शेयर बाजार में निवेश का शौक लगा। उसने उधार रकम लेकर शेयर खरीदे। गत वर्ष उसे शेयर बाजार में 10 से 12 लाख रुपए का नुकसान हुआ। इसकी भरपाई नहीं कर पाया। उस पर अब तक करीब 18 लाख का कर्जा हो गया था। लेनदारों के तकाजे से वह परेशान हो गया। उसने अपने दोस्त और परिचितों से राशि उधार ले रखी थी, लेकिन किसी से बड़ी राशि नहीं ली। उसने लोगों से 50 से 60 हजार रुपए तक ही उधार लिए।

नई जिंदगी की शुरुआत, कर्जदारों से पीछा छूटे
लेनदारों से परेशान नारायण नई जिदंगी की शुरुआत करना चाहता था। उसने खुद के मरने का झूठा नाटक रचा। इसके लिए उसने एक सप्ताह पूर्व ही इसकी तैयारी कर ली। उसने एक बैग में अपने कपड़े और कुछ सामान रख लिया। इस बैग को पंचायत समिति परिसर में छिपा दिया। बैंक खाते से करीब 25 हजार रुपए निकाल कर अपने पास रख लिए। कहानी को अंजाम देने से पहले उसने क्राइम के कई सीन सोशल मीडिया पर देखे। यहां तक की शाहिद कपूर की चुप-चुप फिल्म में भी इस तरह का सीन देखा। गांव से लापता होने से पहले उसने दो मोबाइल खरीदे। सिम भी नई ले ली। एक नया मोबाइल और सिम अपने साथ ले गया, जबकि एक मोबाइल को घर पर ही रखकर गया। उसने एक सप्ताह पूर्व खेत के पास नील गाय की हड्डियां देखी थी। उसने इन हड्डियों को जला दिया, ताकि यह इंसान की लग सकें।

चित्तौड़ गया और ट्रेन से बैठ गया

17 दिसम्बर की रात में अपनी बाइक से चित्तौडगढ़़ गया। वहां बाइक खड़ी करके टे्रन में बैठ गया और महाराष्ट्र पहुंच गया। मुम्बई पहुंचने के बाद वहां दो दिन रहा। इसके बाद गोवा चला गया। इस बीच पुलिस को उसके नए मोबाइल और सिम का पता लग गया। पुलिस टीम उसके पीछे हो गई। उसे जाना कहां, यह पता नहीं था। केवल स्टेशन पर टे्रन देखकर बैठ जाता था। पुलिस गोवा पहुंची तो वह छत्तीसगढ़ के लिए रवाना हो गया।

एटीएम से निकाली राशि, रिश्तेदार को फोन भी किया

नारायण ने मुम्बई और गोवा में दो बार कर एटीम से करीब 30 हजार रुपए निकाले। पुलिस को इसकी भनक लग गई। लापता होने के पांचवें दिन उसने गांव में ही एक रिश्तेदार को फोन कर उसके सही सलामत होने की बात कही। पुलिस की टीम नया मोबाइल नम्बर मिलते ही उसकी तलाश में रवाना हो गई।