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10 साल की उम्र में सीखा मांडना बनाना, 58 साल बाद भी सिलसिला जारी, अब मुफ्त में सिखाने का तैयार

10 साल की उम्र में मां से मांडना बनाना सीखा और आज 68 साल की होने के बावजूद उत्साह कम नहीं हुअाा

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10 साल की उम्र में मां से मांडना बनाना सीखा और आज 68 साल की होने के बावजूद उत्साह कम नहीं हुअा

भीलवाड़ा।

10 साल की उम्र में मां से मांडना बनाना सीखा और आज 68 साल की होने के बावजूद उत्साह कम नहीं हुअा। घर आंगनों में हजारों मांडने बनाने के साथ ही 300 से अधिक मांडने अलग-अलग डिजाइनों में कार्ड शीट पर उकेर चुकी है। एेसा करने वाली शख्सियत का नाम है विद्या सोनी, जो शास्त्रीनगर में रहती हैं और शिल्पगुरू बद्रीलाल चित्रकार की पुत्री है।

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वे मां सुमित्रा के सिखाए प्राचीन व परम्परागत मांडने को अपने कार्य से बचाने को प्रयत्नशील है। विद्या 58 साल से मांडने बना रही है। उनके मांडने विदेशियों को भी भाते हैं। कला प्रेमियों में भी प्रसिद्ध है।विद्या का कहना है, जिस प्रकार से कच्चे मकान धीरे-धीरे विलुप्तगी के कगार पर है, उसी तरह प्राचीन मांडने भी विलुप्त होते जा रहे है। प्राचीन समय में घरों में कच्चे आंगन में गोबर, पीली मिट्टी व खड़ीया से बनाए जाते थे।

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अब केवल गांवों में कुछ कच्चे मकानों में मांगलिक आयोजनों व त्योहारों पर महिलाओं कुंची से मांडने बनाते हुए देखा जा सकता है।
नि:शुल्क सिखाने को है तैयार: विद्या पुत्र किरण व घर की बहुओं के साथ ही भावना, संतोष सहित आसपास की महिलाओं को मांडना बनाना सीखा रही है। विद्या का कहना है कि इस परम्परा को जीवित रखने के लिए वह नि:शुल्क सेवा देने के लिए तैयार है।
बकौल विद्या, परम्परागत मांडने को संरक्षण की जरूरत है। विभिन्न माध्यमों से जन-जन तक

डेयरी ने निकाला 200 एमएल पैक में घी

भीलवाड़ा भीलवाड़ा जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ ने सरस घी के नाम पर 200 एमएल पैक में घी जारी किया है। कीमत 85 रुपए रखी गई है। डेयरी के प्रबन्ध संचालक एलके जैन ने बताया कि लम्बे समय से 200 एमएल के पैक घी उतारने की योजना थी लेकिन आरसीडीएफ से मंजूरी नहीं मिल पा रही थी।