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मेडिकल कॉलेज निर्माण की राह से बाधा दूर

मेडिकल कॉलेज निर्माण की राह में आई बाधा गुरुवार को दूर हो गई। नए सिरे से निर्माण कार्य को लेकर हुई निविदा गुरुवार को गुजरात की मालानी कंस्ट्रेक्शन कम्पनी राजकोट के नाम खुली।

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Tej Narayan Sharma

Jun 17, 2016

मेडिकल कॉलेज निर्माण की राह में आई बाधा गुरुवार को दूर हो गई। नए सिरे से निर्माण कार्य को लेकर हुई निविदा गुरुवार को गुजरात की मालानी कंस्ट्रेक्शन कम्पनी राजकोट के नाम खुली। कॉलेज भवन निर्माण एवं महात्मा गांधी चिकित्सालय में नवनिर्माण को लेकर कम्पनी की बीएसआर दर अन्य कम्पनियों की तुलना में सबसे कम रही। एेसे में दोनों निर्माण कार्य कम्पनी को सौंपने की अंतिम मंजूरी के लिए राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम (आरएसआरडीसी) पत्रावली निदेशालय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग जयपुर को भिजवाएगा।

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परियोजना अधिकारी अनिल माथुर ने बताया कि मेडिकल कॉलेज निर्माण को लेकर राज्य सरकार ने शार्ट टर्म निविदा जारी की थी। इसके चलते मेडिकल कॉलेज भवन निर्माण कार्य के बजट को विभिन्न निविदाओं में बांट दिया गया। प्रथम चरण के निर्माण कार्य के लिए सरकार ने नए सिरे से निविदा प्रक्रिया अपनाई। इसके चलते मेडिकल कॉलेज भवन के निर्माण के लिए 80 करोड़ 40 लाख रुपए की निविदा के लिए कुल सात निविदा आई।

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इसमें पात्रता की जांच के दौरान एक निविदा निरस्त हो गई। जबकि महात्मा गांधी चिकित्सालय में नव निर्माण को लेकर 12 करोड़ 35 लाख रुपए के कार्य के लिए आई छह निविदा में से दो निविदा निरस्त हो गई। शेष 10 निविदाओं की वित्तीय बिड गुरुवार को सबसे न्यूनतम बीसआर दर के आधार पर खोली गई।

एक ही कम्पनी के नाम दो निविदा

मालानी कंस्ट्रेक्शन कम्पनी ने कॉलेज निर्माण व महात्मा गांधी चिकित्सालय में नव निर्माण को लेकर निविदा लगाई थी। कम्पनी की दो ही निविदा में बीएसआर दर अन्य कम्पनियों की तुलना में सबसे कम रही। एेसे में दोनों ही निर्माण की वित्तीय बिड कम्पनी के पक्ष में जारी की गई। कॉलेज निर्माण की बीएसआर 2.70 फीसदी व चिकित्सालय निर्माण की बीएसआर 3.60 फीसदी ही अधिक रही। जबकि अन्य कम्पनियों की बीएसआर दरें पन्द्रह से फीसदी तक अधिक रही।

81 फीसदी से लुढकर 2.70 फीसर्दी बीएसआर

29 फरवरी को निर्माण कार्य की निविदा मुम्बई की सापोरजी-पालोंजी एंड कंस्ट्रक्शन कम्पनी के नाम खुली थी, लेकिन प्रथम चरण के कार्य के लिए बीसआर 81 फीसदी अधिक आने से कम्पनी की निविदा विवाद में उलझ गई। इसके बाद कम्पनी को सरकार ने बीएसआर दर कम करने का एक और मौका दिया, लेकिन इसमें भी कम्पनी की बीएसआर 60 फीसदी अधिक ही बनी रही। एेसे में राज्य सरकार ने 16 मई को निविदा प्रक्रिया ही निरस्त कर दी।

टुकड़ों में बंटता बजट

275.91 करोड़ रुपए की परियोजना है। इसमें प्रथम चरण के लिए 189 करोड़ रुपए मंजूर है। इसमें 50 करोड़ रुपए का बजट चिकित्सकीय जांच उपकरण की खरीद के लिए है। इसमें से 23 करोड़ रुपए की कटौती सीमेंट सरकार की तरफ से देने से हुई। एेसे में प्रथम चरण के निर्माण के लिए कुल 116 करोड़ रुपए का बजट है। इस बजट के भी अब टुकड़े हो गए है।

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