मानसून ने फिर दस्तक दे दी। आफत सिर पर खड़ी है। इसके बाद भी जिम्मेदार नहरों की मरम्मत पर सुध नहीं ले पाए। गांव तो दूर, शहर से गुजर रही मेजा नहर तक की सुध नहीं ली गई। आलम यह है कि आबादी बस्ती के बीच से गुजर रही नहर जगह-जगह से क्षतिग्रस्त है। इससे कभी लगातार बरसात इलाके में परेशानी खड़ी कर सकती है। राजस्थान पत्रिका ने नहर की सुध ली तो हालात कुछ इसी तरह के नजर आए।