scriptMonsoon on the threshold of farewell, we could not even cross the cent | विदाई की दहलीज पर मानसून, औसत का शतक भी नहीं कर पाए हम पार | Patrika News

विदाई की दहलीज पर मानसून, औसत का शतक भी नहीं कर पाए हम पार

locationभीलवाड़ाPublished: Sep 18, 2022 11:39:52 am

Submitted by:

Akash Mathur

जिले से एक बार फिर मानसून विदाई लेने की तैयारी में है। मानसून ने भले ही जिले पर मेहरबानी दिखाई। लेकिन इस बार भी हम बारिश में औसत का शतक नहीं लगा पाए। औसत के मुकाबले अब तक अभी भी आठ प्रतिशत बारिश कम रही है। वहीं जिले के बांध और तालाबों में 36 प्रतिशत ही पानी की आवक हुई है। मानसून ने एक बार फिर ऊपरमाल क्षेत्र बिजौलियां और मांडलगढ़ पर जमकर मेहरबानी दिखाई।

विदाई की दहलीज पर मानसून, औसत का शतक भी नहीं कर पाए हम पार
विदाई की दहलीज पर मानसून, औसत का शतक भी नहीं कर पाए हम पार
जिले से एक बार फिर मानसून विदाई लेने की तैयारी में है। मानसून ने भले ही जिले पर मेहरबानी दिखाई। लेकिन इस बार भी हम बारिश में औसत का शतक नहीं लगा पाए। औसत के मुकाबले अब तक अभी भी आठ प्रतिशत बारिश कम रही है। वहीं जिले के बांध और तालाबों में 36 प्रतिशत ही पानी की आवक हुई है। मानसून ने एक बार फिर ऊपरमाल क्षेत्र बिजौलियां और मांडलगढ़ पर जमकर मेहरबानी दिखाई। ऊपरमाल क्षेत्र के लगभग सभी जलाशय लबालब हो गए है। यहां पेयजल के साथ सिंचाई का पूरा बंदोबस्त हो गया जबकि आसींद और बदनोर क्षेत्र में मेघों ने कंजूसी बरती।

आसींद में खारी नदी गेज चढ़ना दूर सपाट मैदान में ही तब्दील है। दरअसल, जिले में 630 मिलीमीटर बरसात का औसत है। इसके मुकाबले अब तक 584 मिलीमीटर बरसात हो चुकी है। जो कि औसत की 92 प्रतिशत ही बारिश हुई है।
भीलवाड़ा अव्वल, मोखुंदा में सबसे कम

जिले में भीलवाड़ा में इस बार सर्वाधिक बरसात हुई। यहां 907 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई। जबकि मोखुंदा में सबसे कम 331 मिलीमीटर बरसात हुई। इसी तरह आसींद 450, बदनोर 389, बनेड़ा 723, हमीरगढ़ 564, हुरड़ा 488, जहाजपुर 778, कोटड़ी 739, मांडल 513, करेड़ा 810, मांडलगढ़ 630, रायपुर 557, सहाड़ा 567, शाहपुरा 528, फूलियाकलां 329, बिजौलियां 814, शम्भूगढ़ 417, डाबला 416, कारोही 572, रूपाहेली 446, शक्करगढ़ 685, पारोली 820, बागोर 503, ज्ञानगढ़ 417 तथा काछोला में 811 मिलीमीटर बरसात हुई।

यह बांध लबाबल

मानसून की मेहरबानी के कारण इस बार गोवटा, जेतपुरा, जूट का नाका, कोठारी, पचानपुरा, झडोल, मंडोल, गुवारड़ी, डामटी कोकरा तथा शक्करगढ़ बांध लबालब हुआ। जबकि जिले का सबसे बड़ा मेजा बांध में 31 फीट के मुकाबले अब तक साढ़े आठ फीट ही पानी आया है। खारी बांध, नाहर सागर, उम्मेदसागर, मांडल तालाब, चन्द्रभागा, रायथिलियास समेत कई बांध खाली पड़े है।

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