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एमटीएम के श्रमिकों को मिलेंगे 4 करोड़ रुपए

उच्च न्यायालय ने दिए लिक्विडेटर को आदेश

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MTM workers to get Rs 4 crore in bhilwara

MTM workers to get Rs 4 crore in bhilwara

भीलवाड़ा।
मेवाड़ टेक्सटाइल मिल्स (एमटीएम) के ११७० श्रमिकों को मिल में शेयर राशि व भुगतान का ब्याज मिलेगा। यह राशि भुगतान करने के पांच साल बाद करीब ४ करोड़ रुपए होगी। भुगतान का आदेश उच्च न्यायालय ने ऑफिशियल लिक्विडेटर को दिए हैं।
मिल श्रमिकों की बनाए एमटीएम थ्रिफ्ट एण्ड क्रेडिट सोसायटी लिमिटेड के सदस्यों ने पिछले साल उच्च न्यायालय में मिल में शेयर राशि, मिल बंद होने तथा भुगतान होने के बीच के समय का ब्याज तथा कुछ श्रमिकों के त्यागपत्र को मिल बन्द होने की तारीख तक मानने को लेकर याचिका लगाई थी।
न्यायालय ने मिल में शेयर राशि को नियमानुसार देने के आदेश दिए। इसमें करीब ४७ हजार शेयर जमा हैं। शेयर राशि लेने के लिए ऑफिशियल लिक्विडेटर को आवेदन करना होगा। २३ फरवरी २०१० को मिल बंद होने की तारीख को मानते जिस दिन कर्मचारियों को भुगतान किया गया है उसके बीच की अवधि का पंजाब नेशनल बैंक की एफडीआर की ब्याज दर के अनुसार ब्याज देना होगा। कर्मचारियों को अगस्त २०१४ में भुगतान किया था। इससे कर्मचारियों को ३.६० करोड़ की राशि यानी ५९९ दिन का ब्याज तथा ४७ लाख रुपए शेयर राशि मिलेगी। यह राशि ५०० से २००० के बीच होगी। एमटीएम सोसायटी सदस्य फतहलाल हेड़ा ने बताया, त्यागपत्र के मामले में सुनवाई १५ जुलाई को होगी। ऑफिशियल लिक्विडेटर डीके मीणा का कहना है कि ब्याज व शेयर राशि के लिए एमटीएम मिल के सभी कर्मचारियों से आवेदन मांगे गए है। आवेदन के बाद ही तय होगा कि कितनी राशि श्रमिकों को मिलेगी।
यह है मामला
मेवाड़ रियासत के तत्कालीन हाकम जसवंत सिंह ने एमटीएम के लिए 12 अगस्त 1936 को सौभागमल लोढ़ा को 1100 रुपए में 184 बीघा जमीन दी। मिल बाद में भीलवाड़ा की जीवनरेखा बन गई। मिल में 125 फीट ऊंची चिमनी यहां की पहचान बन गई थी। इसे मिल के खरीदारों ने गिरा दिया। 1984 में तत्कालीन प्रबन्धक संपतमल लोढ़ा ने मिल बंद कर दी। 1986 में सरकार ने अधिकार में ले लिया। मिल चलाने के लिए प्रशासक बैठा दिए। 1 सितंबर 97 को मिल पूरी तरह बंद हो गई। न्यायालय के आदेश पर मिल की फरवरी 2007 में सीज की गई। 4 दिसंबर 2009 को ऑफिशियल लिक्विडेटर ने यह जमीन १२५ करोड़ में उदयपुर की कपंनी गीतांजलि इन्फोसिस के नाम नीलाम कर दी थी।