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दिगम्बर जैन समाज के 300 बच्चों का एकसाथ उपनयन

शहर की आरके कॉलोनी के आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर की ओर से राजस्थान में पहली बार एक साथ उपनयन संस्कार रविवार को यहां किया गया।

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दिगम्बर जैन समाज के 300 बच्चों का एकसाथ उपनयन

दिगम्बर जैन समाज के 300 बच्चों का एकसाथ उपनयन

भीलवाड़ा शहर की आरके कॉलोनी के आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर की ओर से राजस्थान में पहली बार एक साथ उपनयन संस्कार रविवार को यहां किया गया। मुनि आदित्यसागर संसघ के सानिध्य में देश के विभिन्न हिस्सों से जैन समाज के लोग अपने बालक-बालिकाओं के साथ भीलवाड़ा पहुंचे। तरणताल में तीन घंटे से अधिक समय चले कार्यक्रम को देखने शहर भर से समाजजन जुटे।


मुनि आदित्य सागर महाराज ने 300 बालक-बालिकाओं के अभिषेक का गंधोदक लगाया। मुनि अप्रमित सागर व सहज सागर ने केसर तिलक लगाया। बालिकाओं के मस्तक पर ब्रह्मचारिणी बहन ने क्रिया की। तीनों मुनियों ने एक-एक के मस्तक पर विद्या, भावना व वर्धमान मंत्र बोलकर लवंग एवं पुष्प छेपन किए। इस क्रिया डेढ घंटा लगा। मुनि ने 108 सरस्वती मंत्रों के साथ बालकों में ज्ञान एवं लब्धि वर्धि के लिए पुष्प अर्पित किए। बालकों की मुख शुद्धि क्रिया की।

इस दौरान मुनि आदित्य सागर ने कहा कि भीलवाड़ा अब तक वस्त्रनगरी के नाम से जानी जाती थी, लेकिन अब संस्कारित नगरी से भी जानी जाएगी। माता-पिता अपने बच्चों को संस्कारित नहीं किया तो अन्तिम संस्कार की व्यवस्था भी नहीं हो पाएगी। बचपन में बच्चों को ऊंगली पकड़ के मंदिर लाना होगा। बच्चों से कहा कि कभी भी किसी मुनि की निंदा नहीं करना। जो साधु अपने नगर में आए उनके दर्शन करने जरूर जाना। महाराज ने कहा कि जो बच्चे संस्कार होने से रह गए उन्हें 5 नवंबर को विद्यासागर वाटिका में संस्कारित किया जाएगा।

मंदिर ट्रस्ट सचिव अजय बाकलीवाल ने बताया कि सुबह 6 बजे अभिषेक क्रिया के बाद शिवाजी पार्क से जुलूस के साथ बालकों को मंडप लाया गया। सौरभ कुमार, अतुलकुमार अशोकनगर ने मुनि का पाद प्रक्षालन किया। महेंद्र, विपिन, रागांश सेठी ने शास्त्र भेंट किए। ट्रस्ट अध्यक्ष नरेश गोधा ने बताया कि शनिवार रात एक बजे तक बाहर से आए समाजजनों का पंजीयन किया गया।