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नकाते का कोरोना पर चार टारगेट से निशाना

Nakate's target with four targets on Corona भीलवाड़ा जिले में कोरोना की दूसरी लहर का सर्वाधिक असर अप्रेल के अंतिम व मई के प्रथम पखवाड़े में दिखा। जिला प्रशासन को कोरोना संक्रमण से निपटने में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा, इस बारे में जिला कलक्टर शिवप्रसाद नकाते से पत्रिका संवाददाता नरेन्द्र वर्मा की विशेष बातचीत।

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Nakate's target with four targets on Corona

Nakate's target with four targets on Corona

भीलवाड़ा। जिले में कोरोना की दूसरी लहर का सर्वाधिक असर अप्रेल के अंतिम व मई के प्रथम पखवाड़े में दिखा। इस दौरान एकाएक न केवल संक्रमितों की संख्या बल्कि मौत का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ा। हालांकि मई के दूसरे पखवाड़े में शहर एवं जिले में संक्रमित घटे। संक्रमितों की मृत्यु का ग्राफ भी कुछ कम हुआ। यहां एमजीएच से लेकर निजी चिकित्सालयों में ऑक्सीजनयुक्त बेड की कमी भी धीरे-धीरे दूर होने लगी है। जिला प्रशासन को कोरोना संक्रमण से निपटने में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा, इस बारे में जिला कलक्टर शिवप्रसाद नकाते से पत्रिका संवाददाता नरेन्द्र वर्मा की विशेष बातचीत।


सवाल: संक्रमण की चेन तोडऩे की अब तक की रणनीति?

जवाब: संक्रमितों की बढ़ती संख्या को लेकर चार सूत्रीय कार्य योजना बनाई। उस पर पूरा फोकस कर टीम वर्क किया जा रहा है। उसका परिणाम है कि रोगियों की संख्या अब कम होने लगी है।
सवाल: ब्लॉक स्तर की रणनीति क्या थी ?

जवाब: सर्वप्रथम ब्लॉक स्तर पर संक्रमितों व संदिग्धों के इलाज की व्यवस्था की। प्राथमिक स्वास्थ्य एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के साथ ही चिंहित स्थलों पर कोविड केयर सेंटर खोले व इलाज शुरू किया। ऑक्सीजनयुक्त बेड की उपलब्धता सुनिश्चित की। परिजनों को आश्वस्त किया कि जरूरत पड़ी तो रोगी को तुरंत भीलवाड़ा रैफर कर पर्याप्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
सवाल: ऑक्सीजन की कमी से उपजी स्थिति कैसे संभाली?

जवाब: रोगियों की संख्या एकाएक बढऩे के साथ ही सबको ऑक्सीजन की जरूरत भी बढऩे लगी। ऐसी स्थिति में पड़ोसी चित्तौडग़ढ़ व राजसमंद की मदद ली गई। किशनगढ़ से मदद जारी है। अन्य जिलों से भी मदद ली गई। जिला मुख्यालय पर अब ऑक्सीजन प्लांट लगा रहे हैं।
सवाल: ऑक्सीजन ऑडिट का फॉर्मूला क्या रहा ?

जवाब: प्रशासनिक स्तर पर ऑक्सीजन उपयोग की जांच के लिए टीम बनाई। उसने ऑडिट की। टीम की रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सालयों से ऐसे भर्ती मरीजों को छुट्टी दी, जिनका ऑक्सीजन लेवल अच्छा था और तबीयत में सुधार था। समूची ऑक्सीजन वितरण प्रणाली को भी मजबूत किया।
सवाल: सर्वे की जरूरत पड़ी क्या ?

जवाब: शहर एवं जिले में समय रहते डोर टू डोर सर्वे किया। सर्दी, जुकाम व खांसी, बुखार के रोगी चिंहित होने पर तत्काल घरों में दवा पहुंचाई। गंभीर रोगियों के लिए अलग से टीम बनाकर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई। सर्वे टीमों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए चिकित्सा व प्रशासनिक अधिकारियों को भी जोड़ा।
सवाल: शादी समारोह पर किस प्रकार का नियंत्रण रहा ?

जवाब: जिले में कफ्र्यू व लॉकडाउन से पूर्व ही शादी समारोहों को लेकर आयोजकों से उपखंड स्तर तक समझाइश शुरू की। कई आयोजकों ने समारोह स्थगित किए। अधिकांश ने रिसोर्ट व होटलों के बजाए घरों में शादी कार्यक्रम किए। इनमें दूल्हा-दुल्हन समेत सिर्फ ११ जनों की मौजूदगी तय की गई।
सवाल: कोविड वॉर रूम (कंट्रोल रूम) ने कैसे मदद की?

जवाब: कोविड वॉर रूम में अधिकारियों व कर्मियों ने २४ घंटे तत्परता दिखाई। रेमडेसिविर इंजेक्शन, ऑक्सीजन युक्त बेड, एमजी में भर्ती होने आदि जरूरतों को लेकर फोन आने पर तत्काल सत्यापन कराया गया व जरूरत के मुताबिक व्यवस्था की। जरूरतमंदों को भोजन, आवास व कोविड सेंटर की सुविधा भी दी।

सवाल: लॉकडाउन में किस प्रकार की सख्ती है?
जवाब: लॉकडाउन की सख्ती से पालना करा रहे हैं। जिले की सीमाएं सील है। पुलिस-प्रशासन शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में रूट मार्च कर रहा है। लोगों को बेवजह सड़क पर नहीं आने को पाबंद किया। गाइडलाइन तोडऩे पर पुलिस ने करीब तीन हजार लोगों को संस्थागत क्वांरटीन भी किया। टीम वर्क के कारण हम मजबूत हुए। पुलिस-प्रशासन व लोगों की एकजुटता से ही संक्रमण की चेन तोड़ी जा सकती है।