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ग्वाल बालों ने मटखियां फोड़ी, मलखंभ पर आजमाया जोर

 कृष्ण जन्मोत्सव के दूसरे दिन बुधवार को भी शहर के प्रमुख मंदिरों में नंदोत्सव मनाया। इस दौरान बधाई गीत गाए गए। मिठाइयां बांटी गई। 

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भीलवाड़ा के दूदाधारी मंदिर में मटकी फोड़ व मलखंभ पर जोर आजमाते युवा

भीलवाड़ा।

कृष्ण जन्मोत्सव के दूसरे दिन बुधवार को भी शहर के प्रमुख मंदिरों में नंदोत्सव मनाया। इस दौरान बधाई गीत गाए गए। मिठाइयां बांटी गई। मक्खन की मटकियां फोड़ी गर्इं तथा मल्लखम्भ पर युवाओं ने व्यायाम प्रदर्शन किया। बधाई गीत में महिलाओं ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। वहीं मिठाई व चाकलेट तथा फल लूटने के लिए बच्चे ही नहीं महिलाएं व बुजुर्ग भी पीछे नहीं रहे। कृष्ण जन्मोत्सव के दौरान लुटाई जा रही मिठाई पाकर हर कोई अपने को धन्य समझ रहा था। यहां होने वाला कार्यक्रम देखकर मथुरा वृंदावन की याद ताजा हो गई। जन्माष्टमी के एक दिन बाद कृष्ण जन्मोत्सव पर विशेषकर स्वर्णजडि़त नंद महल बनाया गया। भगवान कृष्ण के दर्शन के लिए ७ द्वार बनाए जगए थे।

PIC : कृष्ण जन्मोत्सव पर झांकियों में दिखे आजादी के रंग

सांगानेरी गेट स्थित दूधाधारी मंदिर गोपालद्वारा में बुधवार सुबह से ही जन्मोत्सव को लेकर लोगों में उत्साह देखने को मिला। यहां मुख्य आयोजन मटकी फोड़ प्रतियोगिता व मल्लखम्भ पर चढ़ते हुए प्रसाद की चार थैलियों को तोडऩे की रही। इस दौरान सैकड़ों लोग जमा थे।
मंदिर के महंत दीनबन्धु शास्त्री ने बताया कि मंदिर में यह कार्यक्रम चालीस वर्ष से चल रहा है। कृष्ण जन्माष्टमी के दूसरे दिन मटकी फोडऩे की लीला का आयोजन किया गया। ग्वाल-बाल पीले एवं केसरिया रंग वस्त्रों में एक दूसरे पर चढ़कर युवाओं की टीम ने कई प्रयास किए लेकिन अनन्त: मटकी को फोड़ते ही उसमें से हल्दी व दही की धार फूट पड़ी।

PIC: कान्हा को देख मचल उठी नन्ही आंखें

मटकी फोड़ लीला के बाद मल्लखम्भ लीला का आयोजन हुआ। कार्यक्रम करीब साढ़े छह बजे तक चला। मंदिर के पीछे ही मैदान में एक खम्भा था। इस पर मुल्तानी मिट्टी और सरसों के तेल से पोता गया। उसके ऊपर की ओर एक गठरी में पंचमेवा, उपहार स्वरूप कुछ पैसे रखे थे। उसे पाने के लिए मल्लखम्भ खेला गया। 'नन्द के आनन्द भयो, जय कन्हैया लाल कीÓ जयकारों के बीच यह खेल चला। ग्वाल एक दूसरे के कंधे पर चढ़कर मल्लखम्भ की गठरी तक पहुंचने का प्रयास करते तो कुछ लोग पानी की बौछार कर रहे थे।