
श्रावण में नरबेश्वर बना पिकनिक स्पॉट
धर्मनगरी बस्सी में शिवसागर तालाब की पाल स्थित नरबेश्वर महादेव मंदिर करीब 445 वर्ष पुराना है। बस्सी की स्थापना के समय बस्सी के संस्थापक रावत जयमल चुंडावत ने यहां गढ़ की प्राचीर, शिव सागर तालाब, लक्ष्मीनाथ कुंड, लक्ष्मीनाथ मंदिर आदि के निर्माण के साथ साथ प्राचीन नरबेश्वर महादेव मंदिर का भी निर्माण करवाया था । shraavan mein narabeshvar bana pikanik spot
रावत जयमल चुण्डावत के वंशज कर्नल रणधीर सिंह बताते है कि नरबेश्वर महादेव मंदिर स्थापत्य कला का बेजोड़ उदाहरण है। इतने वर्षों बाद भी मंदिर कहीं से भी खंडित नहीं हुआ है। इसके अलावा मंदिर पर इतने वर्षों में कभी भी बारिश के दौरान बिजली नहीं पड़ी है । अरावली पर्वत श्रृंखला की पहाड़ियों से बारिश के दौरान बहने वाला पानी शिवसागर तालाब में पहुंचता है।
श्रावण में मन्दिर के अंदर स्थापित शिवलिंग का प्रतिदिन अलग-अलग श्रृंगार किया जाता है। शिवलिंग के सामने ही मंदिर के अंदर नंदी विराजमान है। मंदिर के अंदर पार्वती माता की मूर्ति भी स्थापित है। मंदिर के समीप हनुमान मंदिर एवं प्राचीन मंशापूर्ण महादेव मंदिर का मंदिर है। श्रावण में मन्दिर में विशेष अभिषेक, हवन होते हैं। नरबेश्वर महादेव मंदिर के समीप स्थित लक्ष्मीनाथ मंदिर की क्षेत्र में काफी मान्यता है, यह कस्बे का मुख्य मंदिर है।
नरबेश्वर महादेव मंदिर के समीप स्थित लक्ष्मीनाथ कुण्ड की स्थापत्य कला बेहतरीन है। लक्ष्मीनाथ कुण्ड, बिनोता की बावड़ी और अठाना के महल के एक ही कारीगर ने बनाए थे । कुंड में चारों तरफ कई सीढ़ियां बनी हुई हैं जिनको इतना सलीके से बनाया गया है कि बारिश के दौरान सभी सीढ़ियों पर पानी एक छोर से दूसरे छोर तक बराबर भरा रहता है, उसमें एक इंच का भी फर्क नहीं होता है।
Published on:
12 Jul 2023 08:09 pm
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