8 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

श्रावण में नरबेश्वर बना पिकनिक स्पॉट

रमणीय एवं दर्शनीय स्थलों की खूबसूरत श्रृंखला होने से चित्तौड़गढ़़ के बस्सी को धार्मिक नगरी के साथ-साथ छोटी काशी के नाम से भी जाना जाता है। बरसात के दौरान समूचे क्षेत्र में प्रकृति खिल उठती है। हरितिमा की चादर आसपास की पहाडि़यां ओढ़ लेती है, नदी व नाले उफान पर आ जाते है तो झरने बह उठते है। यहां नीलिया महादेव, शिवसागर तालाब की पाल स्थित नरबेश्वर महादेव मंदिर व लक्ष्मीनाथ कुंड भी चहुंओर बिखरी प्राकृतिक खूबसूरती के कारण पयर्टकों का खास आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है।
less than 1 minute read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भीलवाड़ा

•

image

Narendra Kumar Verma

•

Updated: 12 Jul 2023, 8:09 PM IST

श्रावण में नरबेश्वर बना पिकनिक स्पॉट

श्रावण में नरबेश्वर बना पिकनिक स्पॉट


धर्मनगरी बस्सी में शिवसागर तालाब की पाल स्थित नरबेश्वर महादेव मंदिर करीब 445 वर्ष पुराना है। बस्सी की स्थापना के समय बस्सी के संस्थापक रावत जयमल चुंडावत ने यहां गढ़ की प्राचीर, शिव सागर तालाब, लक्ष्मीनाथ कुंड, लक्ष्मीनाथ मंदिर आदि के निर्माण के साथ साथ प्राचीन नरबेश्वर महादेव मंदिर का भी निर्माण करवाया था । shraavan mein narabeshvar bana pikanik spot

रावत जयमल चुण्डावत के वंशज कर्नल रणधीर सिंह बताते है कि नरबेश्वर महादेव मंदिर स्थापत्य कला का बेजोड़ उदाहरण है। इतने वर्षों बाद भी मंदिर कहीं से भी खंडित नहीं हुआ है। इसके अलावा मंदिर पर इतने वर्षों में कभी भी बारिश के दौरान बिजली नहीं पड़ी है । अरावली पर्वत श्रृंखला की पहाड़ियों से बारिश के दौरान बहने वाला पानी शिवसागर तालाब में पहुंचता है।

श्रावण में मन्दिर के अंदर स्थापित शिवलिंग का प्रतिदिन अलग-अलग श्रृंगार किया जाता है। शिवलिंग के सामने ही मंदिर के अंदर नंदी विराजमान है। मंदिर के अंदर पार्वती माता की मूर्ति भी स्थापित है। मंदिर के समीप हनुमान मंदिर एवं प्राचीन मंशापूर्ण महादेव मंदिर का मंदिर है। श्रावण में मन्दिर में विशेष अभिषेक, हवन होते हैं। नरबेश्वर महादेव मंदिर के समीप स्थित लक्ष्मीनाथ मंदिर की क्षेत्र में काफी मान्यता है, यह कस्बे का मुख्य मंदिर है।

नरबेश्वर महादेव मंदिर के समीप स्थित लक्ष्मीनाथ कुण्ड की स्थापत्य कला बेहतरीन है। लक्ष्मीनाथ कुण्ड, बिनोता की बावड़ी और अठाना के महल के एक ही कारीगर ने बनाए थे । कुंड में चारों तरफ कई सीढ़ियां बनी हुई हैं जिनको इतना सलीके से बनाया गया है कि बारिश के दौरान सभी सीढ़ियों पर पानी एक छोर से दूसरे छोर तक बराबर भरा रहता है, उसमें एक इंच का भी फर्क नहीं होता है।