
National Farmer's Day 2023: इरादे नेक व हौसले बुलंद हो तो असंभव भी संभव हो जाता है यह कर दिखाया अमरगढ़ क्षेत्र के रतनपुरा गांव के एक किसान ने जिसने क्षेत्र में नवाचार करते हुए कुसुम के फूलों की खेती शुरू की। जिसे अमरीकन केसर के नाम से जाना जाने लगा है। जो बाजार में हजारों रुपए किलो के भाव से बिकती है। क्षेत्र में सबसे पहले इस नवाचार को कर दिखाया रतनपुरा गांव के शंकरलाल धाकड़ ने जिसने 2 साल पहले कुछ बिस्वा जमीन में कुसुम के फूल की खेती की। जब किसान को कम लागत में अच्छी पैदावार हुई तो अगले साल एक बीघा में बुवाई की ।
अन्य किसानों को किया प्रेरित
किसान ने अच्छी पैदावार व अच्छा मुनाफा होने के बाद इस साल दो बीघा मै कुसुम की फूलों की खेती कर अन्य किसानों को प्रेरित भी किया। इसके बाद अमरगढ़ क्षेत्र के करीब 50 से 60 किसान अपने खेतों में कुसुम के फलों की बुवाई कर चुके है। किसान शंकर लाल धाकड़ ने बताया कि इंटरनेट का सहारा लेकर कुसुम के फूलों की खेती शुरू की है। कुसुम की खेती में कम लागत में फसल से अच्छा लाभ लिया जा सकता है। एक बीघा फसल बुआई में 5 हजार का खर्चा आता है। जिससे करीब 60 से 70 हजार रुपए की इनकम हो जाती है। इस फसल को खेत में गोबर का खाद डालकर अक्टूबर माह में बोया जाता है। इसमें केवल खुदाई, लुराई के अलावा कुछ नहीं करना पड़ता है। पांच माह बाद करीब फरवरी में कुसुम के फूलो के डोडे निकल आते हैं। जो 15 दिन बाद फूलों व बीजों को अलग करने के बाद समेट लिया जाता है। कुसुम के पुष्प और बीजों का तेल एडिबल ऑयल बनाने के काम आता है। साथ ही इसके फूल व बीच नीमच की मंडी में अच्छे भाव में बिक जाते हैं। इस खेती से किसानों को कम लागत में अच्छी पैदावार व मुनाफा मिल जाता है। शंकर लाल कुसुम की खेती के लिए कई किसानों को प्रेरित कर रहे हैं.।
Published on:
23 Dec 2023 10:07 am
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