दो सालों से कोरोना महामारी के कारण गेटं पर ऑयल.ग्रीस तक के लिए पैसा नहीं मिला। बरसों पूर्व जलाशयों के निर्माण के बाद उन्हें एक तरह से लावारिस हॉलत में छोड़ दिया गया है। जल संसाधन विभाग और पंचायत राज विभाग यह मान बैठा है कि कमजोर मानसून से जलाशयों में पानी की आवक नहीं होगी। लेकिन अतिवृष्टि होने पर बांधों और तालाबों की पाल को संभालना भारी पड़ सकता है। जिले में 638.99 मिलीमीटर बरसात का औसत है। इसके मुकाबले गत वर्ष 523 मिलीमीटर बरसात हुई, जो कि औसत का 81.73 प्रतिशत था। जल संसाधन विभाग विभाग अपने कार्य के प्रति कितना सजग है कि जिले के जलाशयों की मरम्मत के लिए 80 करोड़ रुपए का प्रस्ताव बनाकर अब मुख्यालय भेज रहा हैं, जबकि मानसून काल में जलाशयों की मरम्मत ही संभव नहीं है। राजस्थान पत्रिका ने बुधवार को जिले के जलाशयों के हालात और विभागीय बजट की स्थिति देखी तो कई चौकाने वाले हालात सामने आए।