
Neil cow in the well in bhilwara
बागोर
बिना मुंडेर के कुएं वन्यजीवों तथा आम लोगों के लिए खतरा साबित हो रहे हैं। इन कुओं में गिरने से वन्यजीवों सहित लोगों की जान भी जा चुकी है। जिले में कई जगह ऐसे कुएं बने हुए हैं जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। अधिकतर खेतों और सड़क के किनारे बने इन कुओं में गिर कर कई वन्यजीव काल का ग्रास बन चुके हैं।
चार दिन से बागोर के पास बिना मुंडेर के एक कुएं में गिरा रोजड़ा भूख प्यास से तडफ़ रहा है । रोजड़े को कुएं से बाहर निकालने के लिए अभी तक कोई हाथ आगे नही बढ़ पाए हैं। बाज्यां की खेड़ी रोड स्थित नमकीन फेक्ट्री के पास जगदीश सोनी के खेत स्थित बिना मुंडेर के कुएं में चार दिन पूर्व एक रोजड़ा गिर गया। खेत पर सिजारी किशन सिंह कुएं में हलचल सुनाई दी तो उसने कुएं में झांककर देखा तो अंदर रोजड़ा पड़ा हुआ था। सिंह ने इसकी सूचना खेत मालिक व पत्रिका संवाददाता को दी। उन्होंने वन विभाग को सूचना दी। वन विभाग की टीम बुधवार सुबह आकर रोजड़े को कुएं से बाहर निकालेगी। फिलहा ग्रामीणों ने कुएं में हरा चारा डाला है।
बारिश के मौसम में दिखाई नहीं देते
बारिश के मौसम में बिना मुंडेर के कुएं दिखाई नहीं देते। इन कुओं की मुंडेर के आस.पास लंबी घास उग जाने के कारण यह पूरी तरह से ढंक जाते हैं और नजर नहीं आते। भोजन की तलाश में निकले वन्यजीव इन कुओं में गिर जाते हैं। आबादी क्षेत्रों में तो जानकारी मिलने पर रेस्क्यू कर उन्हें बचा लिया जाता हैए लेकिन आबादी रहित क्षेत्रों में अक्सर वन्यजीवों की मौत हो जाती है।
इनकी हुई मौत
19 अगस्त को लाखोला के पास बिना मुंडेर के कुएं में गिरने से एक पैंथर की मौत हो गई। सूचना पर मौके पर पहुंचे वन विभाग की टीम ने रेसक्यूू कर पैंथर को कुएं से बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम करवाया।
-सवाईपुर क्षेत्र में एक गाय कुएं में गिर गई थी, जिसे ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाला।
Published on:
22 Aug 2018 07:13 am
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