
एनजीटी ने की मध्यप्रदेश के अधिकारियों पर तीखी टिप्पणी
कानाराम मुण्डियार
भीलवाड़ा.
पिछले कई सालों से औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले दूषित पानी के कारण नदियां व तालाब दूषित होने तथा सोलिड वेस्ट का निस्तारण सही नहीं होने पर नेशनल ग्रीन ट्रीव्यूनल (एनजीटी) ने सख्त कदम उठाते हुए राज्य सरकार पर 3 हजार करोड़ का जुर्माना लगाया है। यह राशि अगले दो माह में जमा कराने के साथ इसका उपयोग मुख्य सचिव अपने स्तर पर करेंगे। मुख्य सचिव नोडल सचिव की नियुक्ति करने के साथ ही एक तकनीकी अधिकारी को भी लगाना होगा। एनजीटी ने अपने आदेश में कहा कि राजस्थान के शेष 161 शहरों में जहां पर अभी तक सोलिड वेस्ट का निस्तारण का प्लान नहीं बना है तो उसे जल्द लागू करें।
एनजीटी ने अपने आदेश में सरकार ने तीन अलग-अलग क्षेत्र में जुर्माना लगाते हुए कुल 3,000 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। सोलिड वेस्ट का निस्तारण करने तथा ट्रीटमेन्ट प्लांट को नहीं चलाने पर 2500 करोड़ रुपए, 255 करोड़ रुपए अन्य मामले में तथा 555 करोड़ रुपए औद्योगिक इकाइयों के प्रदूषित पानी डिस्चार्ज का प्रबंधन सही नहीं करने पर लगाए हैं। इस राशि को एक समान करते हुए 3 हजार करोड़ रुपए किए हैं। इस राशि को जमा कराने के लिए दो महीने तक का समय दिया गया है। भिवाड़ी, भीलवाड़ा, पाली सहित आधा दर्जन जिलों की सीमेंट या अन्य फैक्ट्रियों से निकलने वाले पानी से नदियों में हो रहे प्रदूषण के चलते लगाया गया है।
भीलवाड़ा में यह स्थिति-
भीलवाड़ा में औद्योगिक इकाइयों का प्रदूषित पानी बनास में जा रहा है। खेती खराब हो चुकी है। खेत बंजर हो चुके है। इसके अलावा गांधीसागर तालाब व धांधोलाई तालाब का पानी भी प्रदूषति हो चुका है। सुवाणा तालाब भी खराब हो चुका है। इसे लेकर कई बार राज्य सरकार ने राजस्थान पत्रिका की ओर से प्रकाशित खबरों को लेकर औद्योगिक इकाइयों को बन्द भी करवाया है। हाल ही में प्रोसेस हाउसों में तीसरे व चौथे चरण स्तर के आरओ लगवाए जा रहे हैं।
सीवरेज की स्थिति-
भीलवाड़ा में 400 किलोमीटर की सीवरेज लाइन डालने का काम पूरा हो चुका है। अब 2 किलोमीटर का काम शेष रहा है। वहीं 2 हजार से अधिक घरों में सीवरेज कनेक्शन हो चुके हैं। सीवरेजड ट्रीटमेन्ट प्लांट भी चलाया जा रहा है। 30 एमएलडी सीवरेज ट्रीटमेन्ट प्लांट के पूरी क्षमता से चलाने में थोड़ा समय लग सकता है।
आदेशों की पालना के दिए निर्देश-
एनजीटी ने अपने आदेश में कहा है कि पर्यावरण को नुकसान को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द अनुपालन सुनिश्चित करने के अलावा राज्य की ओर से पिछले उल्लंघनों के लिए मुआवजे का भुगतान किया जाना चाहिए। दो मदों (ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन) के तहत मुआवजे की अंतिम राशि 3000 करोड़ रुपए आंकी गई है। इसे दो महीने के भीतर अलग खाते में जमा कराया जा सकता है। एनजीटी ने स्पष्ट किया कि यदि उल्लंघन जारी रहता है। तो अतिरिक्त मुआवजा वसूलने पर विचार किया जा सकता है।
यह है न्यायालय का आदेश-
न्यायमूर्ति आदर्शकुमार गोयल की पीठ ने गुरुवार को राजस्थान की नदियों में फैक्ट्रियों के गंदे पानी से होने वाले प्रदूषण को लेकर नाराजगी जताते हुए कहा कि बार-बार कहने पर भी सरकार ने इस और ध्यान नहीं दिया। प्रदेश में सीवरेज प्रबंधन के संबंध में बहाली के उपायों में सीवरेज उपचार और उपयोग प्रणाली की स्थापना, मौजूदा सीवरेज उपचार सुविधाओं के उन्नयन प्रणालियों और संचालन को उनकी पूरी क्षमता का उपयोग सुनिश्चित करने और मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा। इसके अलावा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के संबंध में निष्पादन योजना में आवश्यक अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्रों की स्थापना और बचे हुए 161 शहरों का उपचार भी शामिल होगा।
Published on:
17 Sept 2022 12:24 am
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