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नूतन साध्वी ने 13 महीने तक मौन रहने का लिया संकल्प

नवदीक्षिता को वैदिक मंत्रोच्चार करते हुए युवाचार्य महेंद्र ऋषि ने पांच महाव्रत धारण करवाए

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नवदीक्षिता को देववंदन, गुरूवंदन की क्रियाओं तथा विधी-विधान के साथ वैदिक मंत्रोच्चार करते हुए युवाचार्य महेंद्र ऋषि ने पांच महाव्रत धारण करवाए गए।

भीलवाड़ा।

नवदीक्षिता को देववंदन, गुरूवंदन की क्रियाओं तथा विधी-विधान के साथ वैदिक मंत्रोच्चार करते हुए युवाचार्य महेंद्र ऋषि ने पांच महाव्रत धारण करवाए गए। प्रथम हिंसा का त्याग, दूसरा सत्य, तीसरा चोरी का सर्वदा त्याग, चतुर्थ बह्मचर्य का पालन व पांचवा परिग्रह का त्याग इत्यादि का पचखान दिलवाया गया। वहीं नवदीक्षिता ने 13 महीने तक मौन रहने पचखान लेते हुए जीवन पर्यंत चॉकलेट नहीं खाने का संकल्प लिया। होली चातुर्मास के बाद जब तक युवाचार्य के दर्शन नहीं हो जाते, तब तक साध्वी विश्व वंदना ने भी गेहंू और गेहूं से बनी खाद्य वस्तु ग्रहण नहीं करने का पचखान लिया।

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श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ महावीर भवन पुराना भीलवाड़ा के तत्वावधान में बड़ा मंदिर नाड़ी मौहल्ला स्थित महावीर भवन में शनिवार को श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषि ने सभी साध्वी मंडल के पावन सानिध्य में नव दीक्षिता साध्वी परमेष्ठी वंदना की बड़ी दीक्षा संपन्न कराई। इसके साथ ही नव दीक्षिता का सांसारिक जीवन छूट गया। और वह संतों की श्रेणी में आ गई। हर्ष-हर्ष, जय-जय और भगवान के जयकारों से धर्मसभा गूंजायमान हो उठी। युवाचार्य ने अपने प्रवचनों के दौरान कहा कि कोई भी काम करने से पहले उसका अंजाम सोचना चाहिए। बड़ों की बात को कभी टालना नहीं चाहिए। बड़ों की छत्र-छाया सदैव कवच का कार्य करती है। नवदीक्षिता ने इस अवसर पर कहा कि 6 कायों के जीव को अभयदान देने के साथ मोक्ष की प्राप्ति के लिए संयम मार्ग को चुना है। उम्र छोटी है लेकिन अपनी पूरी जिंदगी धर्म के मार्ग पर चलूंगी।

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अध्यक्ष हनुमानसिंह चौधरी ने बताया कि इस अवसर पर शहर सहित जिले के विभिन्न श्री संघो सहित जैन समाज के सैंकड़ों श्रावक-श्राविकाएं मौजूद थे। उप प्रवर्तक अक्षयऋषि, रितेश मुनि, हरीश मुनि, हितेंद्र मुनि, तेल तप आराधिका साध्वी चंदनबाला, जिनशासन प्रभाविका साध्वी पद्मावती, साध्वी रमीला कंवर, साध्वी मनोहर कंवर, साध्वी पारस कंवर, साध्वी कुसुमलता, साध्वी विमल कंवर साध्वी ज्ञान कंवर, साध्वी चारू प्रज्ञा, साध्वी सूर्य वंदना, साध्वी शासन वंदना व साध्वी वीतराग वंदना सहित सहित श्री संतों का धर्मसभा को आशीर्वचन प्रदान किया। इस दौरान सभी श्रीसंघों के सैंकड़ों श्रावक-श्राविकाएं मौजूद थे। धर्मसभा का संचालन मनोहर छाजेड़ ने किया।


18 को दिलाई थी जैन भागवती दीक्षा
कांचीपुरम में 18 फरवरी को मुमुक्षु प्रियंका का युवाचार्य ने दीक्षा मंत्र-सूत्रों का उल्लेख कर दीक्षा विधि संपन्न कराई तथा जैन भागवती दीक्षा ग्रहण कराकर मुमुक्षु का नामकरण परमेष्ठी वंदना किया था। जिसमें सैंकड़ों की संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने अपनी आशीर्वाद दिया था। बड़ी दीक्षा छोटी दीक्षा के बाद में देते है ताकि परिपक्वता का पालन कर सके, इसमें 15 आयम्बिल एवं एक उपवास की क्रिया करने के पश्चात समयकाल अविधी के बाद बड़ी दीक्षा दिलवाई जाती है।