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राजनीति को स्वच्छ करने का जिम्मा युवाओं के कंधों पर: सुब्बाराव

गांधीवादी समाजसेवी व चिंतक एसएन सुब्बाराव ने कहा, देश में मौजूदा राजनीतिक माहौल अच्छा नहीं है

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गांधीवादी समाजसेवी व चिंतक एसएन सुब्बाराव ने कहा, देश में मौजूदा राजनीतिक माहौल अच्छा नहीं है। नेता स्वार्थ सिद्ध में लगे हैं। एेसे में जरूरी है कि सब पार्टियां चुनाव के बाद एक मंच पर बैठे

भीलवाड़ा.

गांधीवादी समाजसेवी व चिंतक एसएन सुब्बाराव ने कहा, देश में मौजूदा राजनीतिक माहौल अच्छा नहीं है। नेता स्वार्थ सिद्ध में लगे हैं। एेसे में जरूरी है कि सब पार्टियां चुनाव के बाद एक मंच पर बैठे। देश में गरीबी, अज्ञानता के खिलाफ मिलकर लड़े तभी राजनीति के सही मायने निकलेंगे। वे शनिवार को ग्राम भारती में राष्ट्रीय सद्भावना शिविर के शुभारंभ के बाद राजस्थान पत्रिका से बात कर रहे थे।

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उन्होंने कहा, राजस्थान पत्रिका ने कई प्रदेशों में चेंजमेकर अभियान चलाया है। मैं इस की दिल से तारीफ करता हूं। पत्रिका से मेरा गहरा रिश्ता होने की वजह यही है कि वे ऐसे मुद्दे सामने लाता है जो राष्ट्र को जरुरत है। सुब्बाराव ने कहा, मैं ऐसे शिविरों में जाकर युवाओं को यही संदेश देता हूं कि वे राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका ही सबसे कारगर होती है और भारत का भविष्य भी युवाओं के कंधों पर सशक्त बन सकेगा। युवा वर्ग देश को सशक्त बनाने के लिए रचनात्मक कार्यों से योगदान दें। राजनीति में आगे आए।माहौल बदलने में सहयोग करें। यदि इसी तरह जागरुक रहेंगे देश नए मुकाम पर नजर आएगा।

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तो बिखर जाएगा भारत राष्ट्र

चिंतक सुब्बाराव ने कहा, गांधीजी ने जैसे देश की कल्पना की थी वैसा है लेकिन अब बिखरने का खतरा है। कारण है कि सब भाषाई आधार मानकर आगे बढ़ रहे हैं। एेसे में तो गुजरात अलग राष्ट्र होगा और तमिलनाडू अलग राष्ट्र बन जाएगा। यदि पाकिस्तान भी उर्दू के साथ बांग्ला को स्वीकार कर लेता तो बांग्लादेश नहीं बनता। अभी हालात यही रहे तो सब बिखरकर अलग-अलग राष्ट्र हो जाएंगे। एेसे में सबको चाहिए कि एक परिवार की तरह साथ रहना पड़ेगा। देश को इस तरह जोडऩे का काम ? संसद नहीं कर सकती है उसके लिए सबको आगे आना होगा।


सबसे बड़ा पद मिला हुआ

गांधीवादी विचारक सुब्बाराव से पूछा गया कि आपको राजनीतिक दलों ने कई बड़े पदों पर बैठने की पेशकश की लेकिन आपने स्वीकार नहीं किया। इस सवाल पर उन्होंने कहा, अभी जो मेरे पास पद है मेरे लिए यह सबसे बड़ा है। मैं किसी बंधनों में नहीं बंधना चाहता था। उन्होंने कहा, थोपा हुआ अनुशासन व्यक्ति को आदर्श नहीं बनाता। व्यक्ति की वास्तविक खुशी दूसरों को खुश देखने में होनी चाहिए। इसलिए मुझे जिसमें खुशी मिलती है वे काम ही करता हूं। यही मेरे लिए सबसे बड़ा पद है।

प्रार्थना सभा में गीतों से दिया एकता का संदेश


भीलवाड़ा. राष्ट्रीय सद्भावना शिविर शनिवार को प्रसिद्ध गांधीवादी डॉ. एस.एन. सुब्बाराव के नेतृत्व में ग्राम भारती में शुरू हुआ। इसमें 24 भाषाओं के ज्ञाता तथा 15 राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त डॉ. सुब्बाराव ने कहा, मात्र १६ भाषाओं वाला सोवियत संघ भी टूट गया जबकि भारत में १६५२ भाषाएं है। इसके बावजूद अखंड है। हम सभी को इस अखंडता को बनाए रखने के लिए प्रयास करना होगा। मानव के अंदर ईश्वर का वास होता है।

लिहाजा, किसी को भी किसी की हत्या या शोषण करने का कोई अधिकार नहीं है। युवा वर्ग अपनी धरती माता के उपकार और भारतीय संस्कृति को भूलता और भूलाता जा रहा है जबकि लोग इस उम्मीद में हैं कि आने वाला समय युवाओं का है। एेसे में युवाओं को ही अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।


राष्ट्रीय सद्भावना शिविर के आयोजक संजीवनी विकास समिति के अध्यक्ष अक्षय त्रिपाठी ने बताया कि सात दिवसीय शिविर में देश व प्रदेश के गांधीवादी भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम में प्रार्थना सभा हुई। इसमें गीतों के जरिए एकता का संदेश दिया। पूर्व विधायक भंवरलाल जोशी व हगामीलाल मेवाड़ा सहित कई गांधीवादी मौजूद थे।

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