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एक तो बीमार…ऊपर से घंटों इंतजार

भीलवाड़ा. जिले के सरकारी अस्पतालों पर बढ़े भार ने मरीजों की परेशानी बढ़ा दी। मौसम में बदलाव के चलते जिले के सबसे बड़े महात्मा गांधी अस्पताल में मरीजों की लंबी कतार दिखी।

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एक तो बीमार...ऊपर से घंटों इंतजार

एक तो बीमार...ऊपर से घंटों इंतजार

भीलवाड़ा. जिले के सरकारी अस्पतालों पर बढ़े भार ने मरीजों की परेशानी बढ़ा दी। मौसम में बदलाव के चलते जिले के सबसे बड़े महात्मा गांधी अस्पताल में मरीजों की लंबी कतार दिखी। अस्पताल का आउटडोर 2100 पार कर चुका है। ऐसे में हर मरीज का नंबर दो से तीन घंटे में आ रहा है। इधर, निजी अस्पतालों में पांच दिन से हड़ताल जारी है। इससे भी रोगी भार जिला अस्पताल पर बढ़ गया। हड़ताल में शामिल अस्पतालों में भर्ती मरीजाें काे भी डिस्चार्ज किया जा चुका है।


ग्रामीण क्षेत्रों से मरीज सरकारी अस्पताल आ रहे हैं। एमजीएच के अधीक्षक डॉ. अरुण गौड़ का कहना है कि हड़ताल के कारण मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। शनिवार को आउटडोर बंद होने तक 2100 से अधिक मरीज आए थे। उसके बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों से मरीज आए। आपातसेवा के लिए दो डॉक्टर लगा रखे हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों काे सतर्क रहने के निर्देश दिए। अति आवश्यक होने पर ही डॉक्टरों को अवकाश दिया जा रहा है।

सीटी स्कैन मशीन बंद, कर रहे रैफर
रायपुर से आए मरीज के परिजन ने बताया कि पत्नी को सिर में दर्द की शिकायत है। रायपुर में दिखाया तो डॉक्टर ने भीलवाड़ा रैफर कर दिया। यहां किराए से वाहन लेकर पहुंचे तो जिस डॉक्टर को दिखाने आए थे, वे नहीं मिले। दूसरे डॉक्टर को दिखाया है। अन्य मरीज मुकेश सैनी का कहना था, पेट दर्द होने पर अस्पताल पहुंचा तो डॉक्टर ने दवा लिख दी। डॉक्टर का कहना था कि यहां सभी तरह की जांचें हो रही है। केवल सीटी स्कैन मशीन बंद है। ऐसे में कोई मरीज जिसकी सीटी स्कैन जरूरी है, उसे अजमेर या जयपुर मेडिकल कॉलेज रैफर कर रहे हैं।

दोपहर तक लंबी कतारें
दोपहर 12 बजे एमजी अस्पताल में लंबी कतारें लगी थी। रमेश सिंधी नामक मरीज ने बताया, सुबह 10 बजे से लाइन में लगा हूं। दो घंटे बाद नंबर आया। पहले निजी अस्पताल गया था, लेकिन अस्पताल बंद था। एमजी अस्पताल में मौसमी बीमारी के मरीज अधिक आ रहे हैं। रोजाना सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार के मरीज आ रहे हैं। इनकी संख्या 500 से अधिक है। ऐसे में सरकारी अस्पताल में मरीजों की लाइनें लगी रही। ओपीडी के अतिरिक्त सर्जिकल, आर्थोपेटिक सहित अन्य वार्ड में भी मरीज ज्यादा नजर आए। इस दौरान कई सीनियर डॉक्टरों ने व्यवस्था संभाली। मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ा। अस्पताल के डाॅक्टरों का कहना है सुबह से ही इमरजेंसी में विशेष व्यवस्था की गई है ताकि काम प्रभावित ना हो। सुबह-शाम मॉनिटरिंग भी कर रहे हैं।