उन्होंने कहा कि रामकथा गृहस्थ से चलकर भक्ति के पथ पर होते हुए मोक्षपथ तक जाती है, जो जिस बिन्दु से दर्शन करता है वहां तक पहुंचा देते है। उन्होंने कहा कि त्याग का नाम युवावस्था है और अयोध्या कांड भगवान राम के युवावस्था में किए गए त्याग की कथा है। भगवान ने जवानी के 14 वर्ष खुद को तपाया। भगवान ने जीव मात्र को दिशा दिखाई कि किस प्रकार का जीवन जीना है। उन्होंने मित्रता का महत्व समझाते हुए कहा कि जीवन में कम से कम एक मित्र ऐसा होना चाहिए जो हर परिस्थिति में हमारा साथ देने के लिए तैयार हो। अतिथियों का स्वागत श्रीरामकथा सेवा समिति के अध्यक्ष गजानंद बजाज, संरक्षक सुशील कंदोई, महासचिव पीयूष डाड, कन्हैयालाल स्वर्णकार आदि ने किया। मंच संचालन पंडित अशोक व्यास ने किया। कथावाचक परम पूज्य प्रेमभूषणजी महाराज के मुखारबिंद से नगर परिषद के चित्रकूटधाम प्रांगण में 28 सितम्बर तक प्रतिदिन दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक श्रीराम कथा का वाचन होगा।