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जेहन में महज कमाई इसलिए सुविधाएं भुलाई

राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम यात्रियों को सुविधा देने में नाकाम रहा है। कमाई के फेर में शहर से गुजरने वाले विभिन्न मार्गों पर बुकिंग खिड़की बना दी, लेकिन वहां यात्रियों को मूलभूत सुविधा भी नहीं दे सका। राजस्थान पत्रिका ने शहर के विभिन्न बुकिंग खिड़कियों का जायजा लिया तो यात्रियों के बैठने की व्यवस्था थी और ना ही अन्य सुविधा। कई जगह पर बैठने की जगह है तो उसके बाहर अतिक्रमणकारियों ने कब्जा कर रखा है।

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जेहन में महज कमाई इसलिए सुविधाएं भुलाई

जेहन में महज कमाई इसलिए सुविधाएं भुलाई

राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम यात्रियों को सुविधा देने में नाकाम रहा है। कमाई के फेर में शहर से गुजरने वाले विभिन्न मार्गों पर बुकिंग खिड़की बना दी, लेकिन वहां यात्रियों को मूलभूत सुविधा भी नहीं दे सका। राजस्थान पत्रिका ने शहर के विभिन्न बुकिंग खिड़कियों का जायजा लिया तो यात्रियों के बैठने की व्यवस्था थी और ना ही अन्य सुविधा। कई जगह पर बैठने की जगह है तो उसके बाहर अतिक्रमणकारियों ने कब्जा कर रखा है। इससे यात्री प्रतीक्षालय नजर ही नहीं आता।

पुर रोड: खड़े रहने को मजबूर
आजाद नगर चौराहे पर बुकिंग खिड़की है। यहां बैठने के लिए व्यवस्था नहीं है। यात्रियों को बस के इंतजार में खड़े ही रहना पड़ता है। पेयजल का बंदोबस्त तो दूर की बात है। यहां छाया तक नहीं है। यहां से गंगापुर, उदयपुर, अहमदाबाद मार्गाें पर बसों का आवागमन होता है।

अजमेर तिराहा: अतिक्रमण की मार
अजमेर तिराहे पर बुकिंग खिड़की है। यह सबसे व्यस्त मार्ग माना जाता है। कहने को यात्री प्रतीक्षालय है, लेकिन इसके अंदर और बाहर अतिक्रमणकारियों ने कब्जा कर रखा है। हाथ ठेले वालों की भरमार है। प्रतीक्षालय पर भी जलपान वालों ने कब्जा कर रखा है। इससे प्रतीक्षालय नजर ही नहीं आता। इस मार्ग पर अजमेर, ब्यावर, जयपुर, दिल्ली, हरियाणा समेत अन्य रूट के लिए बसें जाती है। यहां भी पेयजल, टॉयलेट समेत अन्य मूलभूत सुविधा नहीं है।

यूआईटी के सामने: जर्जर भवन
यहां भी क्षेत्र के लोगों की सुविधा के लिए बुकिंग खिड़की है। यात्री प्रतीक्षालय का भवन जर्जर है। रोशनदान टूटे हुए हैं तो बैठने की व्यवस्था भी नहीं है। प्रतीक्षालय के बाहर हाथ ठेले वालों ने कब्जा कर रखा है। इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। यहां से भी जयपुर-अजमेर के लिए बस उपलब्ध होती है।

चित्तौड़गढ़ रोड: पानी न टॉयलेट
चित्तौड़गढ़ रोड पर बुकिंग खिड़की है। यहां प्रतीक्षालय बना है, लेकिन यहां ना पीने के पानी का बंदोबस्त है और ना ही टॉयलेट की व्यवस्था। इससे कुछ देर इंतजार करने वाले यात्री को पेयजल के लिए भटकना पड़ता है। इस रूट पर चित्तौड़गढ़, उदयपुर, मध्यप्रदेश के लिए बसें जाती है।

रोजाना 15 लाख कमाई
इस समय भीलवाड़ा आगार में 92 बसों का बेड़ा है। यह लगभग रोजाना 35 हजार किलोमीटर चलती है। आगार की एक दिन की कमाई 15 लाख रुपए है। इसके बाद भी यात्रियों को सुविधा देने पर ध्यान नहीं है। प्रबंधन यात्री सुविधा के लिए समाजसेवियों, नगर निकाय और एनजीओ की मदद भी नहीं ले रहा है।

इनका कहना है
बुकिंग खिड़कियों पर सुविधाओं का अभाव है। इसे दुरस्त किया जाएगा। बुकिंग खिड़की के बाहर अतिक्रमणकारियों को हटाने के लिए पुलिस के साथ निकाय को लिखा है।
- परमवीरसिंह, मुख्य प्रबंधक, भीलवाड़ा आगार