
Opium smuggling
भीलवाड़ा।
पंजाब में अफीम और डोडा चूरा की मांग बढ़ने से वहां के Opium smuggling तस्कर भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ नीमच इलाके में सक्रिय हो गए है। अफीम की उपज निकलने के बाद पिछले कुछ समय से पंजाब के लिए तस्करी बढ़ गई है। भीलवाड़ा पुलिस ने पिछले डेढ़ माह में अफीम और डोडा चूरा तस्करी के छह मामले पकड़े। सभी मामलों में मादक पदार्थ पंजाब ले जाया जा रहा था। इनके पास से पकड़े गए मादक पदार्थ की कीमत ही पचास लाख से ज्यादा की थी। भीलवाड़ा नशे का 'बाइपास बन गया है। पहले जहां मेवाड़ व मालवा से मादक पदार्थ ज्यादातर मारवाड़ ही पहुंचता था, लेकिन अब पंजाब के तस्करों ने नशे की खेप पहुंचाने का रास्ता भीलवाड़ा होकर चुन लिया।
कोटा को छोड़ा, भीलवाड़ा पकड़ा
चित्तौडग़ढ़-प्रतापगढ़ व मालवा़ में काला सोना कहलाने वाले अफीम की अच्छी पैदावार होती है। भीलवाड़ा के कुछ इलाकों में भी अफीम उत्पादन होता है। इससेे इन इलाकों में Opium smuggling तस्करों की नजर रहती हैं। पहले जोधपुर, बीकानेर व बाडमेर के लिए तस्कर भीलवाड़ा का रास्ता चुनते थे पर पंजाब जाने वाले तस्कर चित्तौडग़ढ़ से सीधा कोटा होते, जयपुर से दिल्ली वे जयपुर, अलवर, दिल्ली, हरियाणा के रास्ते पंजाब जा रहे है। लेकिन पंजाब के तस्करों ने अब इस रास्ते को छोड़ चित्तौडग़ढ़ से भीलवाड़ा के रास्ते को चुना। कुछ तस्कर भीलवाड़ा से अजमेर, नागौर, बीकानेर, श्रीगंगानगर होते पंजाब पहुंच रहे है।
दवा से पहले खाते अफीम, किसान-श्रमिक ज्यादा
पंजाब में अफीम को नशीला पदार्थ मानने के बजाय दवा माना जाता है। वहां के लोगों के अनुसार दिनभर फुर्ती रखने के लिए अफीम लेना जरूरी है। यहां लकवा व नसों में ब्लोकेज होने पर दवा से पूर्व अफीम दी जाती है। उनका कहना है कि अफीम से खून तेज दौडऩा शुरू कर देता है। पंजाब में खेती कार्य मे ंभारी श्रम के चलते किसान और फैक्ट्रियों के श्रमिक भी अफीम और डोडे चूरे के पानी का उपयोग करते है।
हाईवे बनने के बाद आसानी, बाइपास से थाने दूर
पकड़ में आए पंजाब के तस्करों ने बताया कि उदयपुर-जयपुर फोरलेन के बाद निर्माणाधीन सिक्सलेन ने उनकी राह आसान कर दी। बाइपास बनने से थाने दूर हो रहे हैं। ट्रॉवेल्स बस और लग्जरी वाहनों ने तस्करों की राह आसान कर दी। मालूम हो, गुजरात भेजी जाने वाली हरियाणा और पंजाब से अवैध शराब की खेप पहले से ही पुलिस महकमे के लिए सिरदर्द बनी हुई है। हाइवे बनने के बाद शराब तस्करों ने जयपुर से अहमदाबाद के लिए भीलवाड़ा के रास्ते को ही चुना है।
एक लाख से अधिक की कीमत
नारकोटिक्स विभाग औसत और गाढ़ता के आधार पर अफीम काश्तकार को भुगतान करता है। विभाग प्रति किलो अफीम के लिए 870 रुपए से 3500 रुपए तक का भुगतान करता है। जबकि अफीम की कीमत बाजार मे एक लाख रुपए तक पहुंच जाती है।
डोडा भी पचास हजार पार
प्रदेश में दो साल से डोडा चूरा की खरीद सरकार ने बंद कर रखी है। इसके बावजूद डोडा चूरा की तस्करी हो रही है। प्रदेश में सरकार डोडा चूरा पहले 125 रुपए से 200 रुपए प्रति किलो तक में खरीदती थी, लेकिन अब यही चूरा तस्करी के जरिए 50 हजार रुपए किलो तक बिक रहा है।
कुछ समय में पकड़ में आए Opium smuggling तस्कर पंजाब के निकले। मेवाड़ से मादक पदार्थ की तस्करी कर भीलवाड़ा के रास्ते पंजाब ले जाते हैं। हाईवे पर बाइपास बन गए और थाने दूर रह जाने से तस्करी को सुलभ मान रहे। हालांकि पुलिस ने मुखबिर तंत्र को मजबूत किया है। जिले में लगातार एनडीपीएस की कार्रवाई हो रही है।
-योगेश यादव, पुलिस अधीक्षक
13 जून को गुलाबपुरा पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान 29 मील चौकी के बाहर बैठे पंजाब के दो युवकों को पकड़ा। उनसे दो कट्टों में 37 किलो डोडा चूरा मिला, जो पंजाब ले जाना था।
17 जून हमीरगढ़ पुलिस ने छाछेड़ी चौराहे पर नाकाबंदी में कार से एक किलो अफीम बरामद की। पंजाब के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। अफीम चित्तौडग़ढ़ से लाए थे और पंजाब ले जानी थी।
Published on:
25 Jun 2019 08:00 pm
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