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राजस्थान फोरम की ऑनलाइन सीरीज में रूबरू हुए चित्रकार जोशी

भीलवाड़ा. कला और कलाकारों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित होने वाली इस बार की चतुरंग ऑनलाइन सीरीज में कला प्रेमियों से रूबरू हुए कल्याण जोशी।
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भीलवाड़ा

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Suresh Jain

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Updated: 11 Nov 2022, 9:57 AM IST

राजस्थान फोरम की ऑनलाइन सीरीज में रूबरू हुए चित्रकार जोशी

राजस्थान फोरम की ऑनलाइन सीरीज में रूबरू हुए चित्रकार जोशी

भीलवाड़ा. कला और कलाकारों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित होने वाली इस बार की चतुरंग ऑनलाइन सीरीज में कला प्रेमियों से रूबरू हुए कल्याण जोशी। कार्यक्रम में बनाई गई पेंटिंग्स को दिखाते हुए उन्होंने बताया कि यहीं पर बैठकर पिता भी चित्रकारी किया करते थे। ये स्टूडियो मेरे लिए पिता की तपोस्थली है, जहां मैं भी चित्रकारी करते हुए तपस्या कर रहा हूं।

चित्रकारी सीखने यहां कहीं छात्र आते हैं। 13वीं सदी के फड़ चित्रकारी के वंश में जन्म लेने वाले जोशी मात्र आठ साल की उम्र से चित्रकारी करने लगे। उन्होंने बताया कि फड़ चित्रकारी में साइड फेस ही बनाया जाता है। ज्यादातर पाबूजी और देवनारायण की गाथा को चित्रकारी के जरिए बनाया जाता है। जोशी ने हनुमान चालीसा की चौपाइयों का भी बहुत सुंदर चित्रांकन किया। इन चित्रों में इस्तेमाल किए जाने वाले रंग हाथ से तैयार करते हैं और उसमें पेड़ से निकलने वाला गोंद मिलाते हैं। सबसे ज्यादा लाल रंग और गोल्ड का इस्तेमाल किया जाता है। चित्रकारी में रंगों का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने बताया कि सबसे पहले त्वचा रंग (पीला रंग) का इस्तेमाल किया जाता हैं और फिर उसके बाद गहनों का (सुनहरा) रंग डाला जाता हैं, बाकी रंगों का इस्तेमाल बाद में किया जाता है। इसमें असली सोने से बना सुनहरा रंग इस्तेमाल किया जाता है। चित्रों के माध्यम से एक पूरी कथा को कह देना सचमुच में बहुत अद्भुत कलाकारी हैं। इन्होंने नेचर सीरीज की अपनी चित्रकारी दिखाई। कार्यक्रम के आयोजन से पहले राजस्थान फोरम के सदस्य पद्मश्री तिलक गितई ने जोशी का परिचय देते हुए सभी श्रोताओं का अभिनंदन किया।