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बंदूकों की बैरल निकाल लगा दिए पाइप, नकली हथियार भी रखे

पुलिस लाइन की हथियार शाखा में भारी गड़बड़ी सामने आई है। शाखा के भौतिक सत्यापन में हथियार ही कम मिले बल्कि असली की जगह नकली हथियार रख दिए गए। बंदूक की बैरल निकालकर पाइप लगा दिया। गड़बड़ी पता चलने पर पुलिस लाइन में हड़कम्प मच गया। जांच हथियार शाखा प्रभारी के सेवानिवृत्ति से पहले कराई गई थी। पुलिस अधीक्षक आदर्श सिधू के आदेश के बाद पुलिस लाइन प्रभारी ने हथियारों से छेड़छाड़ का मामला प्रतापनगर थाने में धारा 409 व 5/25 आर्म्स एक्ट में दर्ज कराया गया है।

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बंदूकों की बैरल निकाल लगा दिए पाइप, नकली हथियार भी रखे

बंदूकों की बैरल निकाल लगा दिए पाइप, नकली हथियार भी रखे

पुलिस लाइन की हथियार शाखा में भारी गड़बड़ी सामने आई है। शाखा के भौतिक सत्यापन में हथियार ही कम मिले बल्कि असली की जगह नकली हथियार रख दिए गए। बंदूक की बैरल निकालकर पाइप लगा दिया। गड़बड़ी पता चलने पर पुलिस लाइन में हड़कम्प मच गया। जांच हथियार शाखा प्रभारी के सेवानिवृत्ति से पहले कराई गई थी। पुलिस अधीक्षक आदर्श सिधू के आदेश के बाद पुलिस लाइन प्रभारी ने हथियारों से छेड़छाड़ का मामला प्रतापनगर थाने में धारा 409 व 5/25 आर्म्स एक्ट में दर्ज कराया गया है। मामले की जांच थानाप्रभारी राजेंद्र गोदारा करेंगे।

थानाप्रभारी गोदारा ने बताया कि पुलिस लाइन के प्रभारी (आरआई) रामसुख गुर्जर ने रिपोर्ट दी। इसमें आरआई ने आरोप लगाया कि पुलिस लाइन में अमानती और जब्त हथियार का प्रभारी हैड कांस्टेबल शंकरलाल था। हैड कांस्टेबल शंकरलाल के सेवानिवृत्त होने के कारण चार्ज हैड कांस्टेबल महावीर प्रसाद को दिया जाना था। एसपी सिधू ने चार्ज सौंपने से पहले 28 जुलाई 2022 को हथियार शाखा का भौतिक सत्यापन कराने के आदेश दिए।

दो टीमों का गठन, विशेषज्ञ शामिल
जब्त व अमानती हथियारों के भौतिक सत्यापन के लिए डीएसपी नरेन्द्र दायमा व आरआई गुर्जर की अगुवाई में दो टीमें बनाई गई। इसमें हथियार विशेषज्ञ शामिल किए गए। डीएसपी के सुपरविजन में शाखा रिकॉर्ड से भौतिक सत्यापन किया गया। पाया कि जब्त व अमानती हथियार दोनों के रजिस्टर अलग-अलग मिले। वर्ष-2012 में नया रजिस्टर बना था। तब से अब तक हथियार शाखा प्रभारी शंकरलाल रहा।

यह मिली खामियां
-सत्यापन में पाया कि जब्त व अमानती हथियारों का रजिस्टर में सही इंद्राज नहीं है।
-अधिकतर हथियारों का मैक, बॉडी नम्बर या कोई निशानी आदि का रजिस्टर में सही ढंग से दर्ज नहीं है।
-कई हथियारों से छेड़छाड़ की गई। बंदूकों की बैरल की जगह लोहे के पाइप व नकली हथियार रख दिए गए। ऐसे हथियार वास्तव में फायरिंग के लायक नहीं रहते।
-छेड़छाड़ होने से अधिकतर हथियार रिकॉर्ड अनुसार नहीं पाए गए।
-हथियारों की संख्या में पूरी नहीं मिली।
-सत्यापन के अनुसार, गड़बड़ी को लेकर हैड कांस्टेबल शंकरलाल संतोषजनक जवाब भी नहीं दे पाया।
-हथियारों की संख्या में कमी, छेड़छाड़, गलत इंद्राज व अन्य अनियमिताएं पाई गई।