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ताऊ शेखावटी को लोककवि मोहन मण्डेला लोक साहित्य पुरस्कार

साहित्यकार कवि ताऊ शेखावटी को लोककवि मोहन मण्डेला लोक साहित्य पुरस्कार से नवाजा गया

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साहित्य सृजन कला संगम साहित्यिक संस्था के तत्तवावधान में आयोजित 21 वां लोककवि मोहन मण्डेला स्मृति अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में साहित्यकार कवि ताऊ शेखावटी को लोककवि मोहन मण्डेला लोक साहित्य पुरस्कार से नवाजा गया।

शाहपुरा।

साहित्य सृजन कला संगम साहित्यिक संस्था के तत्तवावधान में आयोजित 21 वां लोककवि मोहन मण्डेला स्मृति अखिल भारतीय कवि सम्मेलन श्रोताओं की उपस्थिति में भोर तक चला। साहित्यकार कवि ताऊ शेखावटी को लोककवि मोहन मण्डेला लोक साहित्य पुरस्कार से नवाजा गया। जिसमें नकद राशि के अलावा शॉल एवं मानपत्र का वाचन कर कवियों एवं अतिथियों का सत्कार किया गया।

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गीतकार सत्येन्द्र मण्डेला ने मां सरस्वती की राजस्थानी भाषा में झमक जाटणी बण माताजी गीतां घड़ो हिलाओ नी गाई। नाथद्यारा से आए हास्य राज्य के कवि कानू पण्डित ने व्यंग्य रचना वाह रे रोजडा म्हारे पास कोई दूसरो तर्क नी है, थ्हारा म और ये भ्रष्ट नेता में कोई फर्क नी है। अंदाज हाड़ौती ने गौरी थ्हारो रूप कंवल को फूल, भंवरा जूं मन डौले रे सुनाकर सबकी दाद पाई। शाहजहांपुर (म.प्र.) के दिनेश देशी घी ने हास्य की बातों से श्रोताओं को हंसा-हंसा कर लोटपोट कर दिया। परमानन्द दाधीच ने हरा -भरा कर देते जो बंजर के कोने-कोने को, वे बेटे ही जाते है, सरहद पर मस्तक बोने को एवं मातृभूमि के खातिर जीवन दांव लगाना पड़ता है, महावीर से क्षमा मांग हथियार उठाना पड़ता है। गीतकार राजकुमार बादल ने हास्य व्यंग्य एवं शृंगार के गीत - मरवा मोगरा की सौरम रोम-रोम में रमी, एवं श्रोताओं की वन्स मोर पर एक और गीत यो दौर है नयो, नया बदलाव आर्या,कमारिया है भूत और पलीत खार्या राजनीति पर व्यंग्य गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं से खूब दाद पाई। डीग-भरतपुर से आए हिन्दी गीतकार मेघ श्याम मेघ ने पल दो पल तुमको यूं ही निहारा प्रिये, क्या पता कि मन में ही बस जाओगे तथा शृंगार रस में के कई छंदों को श्रोताओं ने सराहा। लोक कवि मोहन मण्डेला लोक साहित्य सम्मान से नवाजे गए कवि पं. ताऊ शेखावटी ने चाट र्या सब चासनी घोटालां की चाट तू भी क्यूं पीछे रहे चाट सके तो चाट तथा हेली बावळी रे तू क्यूं झूठो मगज खपावै सुनाकर श्रोताओं की भरपूर दाद पाई।

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कवि डॉ. कैलाश मण्डेला ने लोक कवि मोहन मण्डेला की रचित गीत जौहर री ललकार जौहर री ललकार जाणल्यो, मरबा रो त्यौहार। मरबा पैली जो मर जाणे, जीवे जुग-जुग लार सुनाकर पदमावती फिल्म पर चल रहे विवाद को प्रासंगिक कर दिया। जगदीश सोलंकी ने जुबां से कुछ न बोले पर तिरंगा जानता है सब तथा यूं तो साथ देने को हजारों हाथ और है, पर तू जरा सा साथ दे तो तेरी बात और है सुनाकर कार्यक्रम का समापन किया। मुख्य अतिथि सांसद सुभाष बहेडिय़ा, अध्यक्ष नगरपालिका अध्यक्ष किरण तोषनीवाल, जिला प्रमुख शक्ति सिंह हाड़ा, विशिष्ठ अतिथि दीनदयाल मारू, उपप्रधान बजरंग सिंह राणावत, नगर कांग्रेस अध्यक्ष बालमुकन्द तोषनीवाल एवं नगपालिका उपाध्यक्ष नमन ओझा ने मां सरस्वती एवं लोककवि मोहन मण्डेला के चित्र पर माल्र्यापण किया। अतिथियों का मेवाड़ी पगड़ी पहनाकर माल्यार्पण किया गया।