विभाग के अनुसार, रसोई का कंप्यूटर ऑपरेटर फोटो से फोटो खींचता। 1 जुलाई से 30 सितम्बर तक लंच व डिनर के अलग-अलग एंगल से फोटो कर कूपन काटे। इसके बाद अलग अलग फर्जी नाम भर दिए। जांच में कई फोटो धुंधले मिले। इन्हें पहचाना नहीं जा सकता। कई फोटो एकदम काले थे।6 अक्टूबर को रेण्डम जांच में यह गड़बड़ी पकड़ी गई। मालूम हो, रसोई में थाली आठ रुपए में दी जाती है। हर थाली पर सरकार रसोई संचालक को 17 रुपए देती है। यानी थाली से संचालक को 25 रुपए मिलते हैं। अब मांडलगढ़ की इस रसोई के लिए नई संस्था चुनी जाएगी। तब तक इस रसोई को नगरपालिका चलाएगी।