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प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगाम: शिक्षा विभाग सख्त, नियम तोड़े तो होगी कार्रवाई

बैठक के बाद तीन स्कूलों का निरीक्षण, यूनिफॉर्म, किताबें व आरटीई नियमों की पालना के निर्देश

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Controlling the arbitrariness of private schools: Education department strict, action will be taken if rules are broken

प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगाम: शिक्षा विभाग सख्त, नियम तोड़े तो होगी कार्रवाई

नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी स्कूलों में यूनिफॉर्म, किताबों और मनमानी फीस को लेकर अभिभावकों की बढ़ती शिकायतों के बीच अब शिक्षा विभाग एक्शन मोड में है। विभाग ने निजी स्कूलों को हिदायत दी है कि वे सरकारी आदेशों की अक्षरश: पालना करें, अन्यथा उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी। चेतावनी को अमलीजामा पहनाने के लिए विभाग ने जमीनी स्तर पर औचक निरीक्षण भी शुरू कर दिए हैं। बैठक दोपहर 2 बजे सेठ मुरलीधर मानसिंहका गर्ल्स स्कूल में हुई।

सीडीईओ की बैठक में दिए निर्देश

शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने प्राइवेट स्कूलों के संचालकों और प्रतिनिधियों की बैठक ली। बैठक सीडीईओेअरूणा गारू, डीईओ राजेन्द्र गग्गड़ और सुवाणा के सीबीईओ रामेश्वर जीनगर ने ली। अधिकारियों ने निजी स्कूलों को दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं होगी। स्कूलों को विशेष रूप से निर्देशित किया कि बच्चों और अभिभावकों पर किसी विशेष दुकान से यूनिफॉर्म या किताबें खरीदने का दबाव नहीं बनाया जाए। स्कूलों को अपने परिसर में कम से कम तीन दुकानदारों की सूची अनिवार्य चस्पा करनी होगी। शिक्षा का अधिकार के तहत निशुल्क प्रवेश की प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए। नियमों की अवहेलना या अभिभावकों से किसी भी प्रकार की शिकायत मिलने पर तुरंत प्रभाव से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मीटिंग खत्म होते ही फील्ड में उतरे अधिकारी

बैठक समाप्त के तत्काल बाद टीम औचक निरीक्षण के लिए शहर के तीन स्कूलों में पहुंची। इनमें सोफिया हायर सेकेंडरी स्कूल, सेंट एंसलम्स और मयूर इंटरनेशनल स्कूल का निरीक्षण किया। हालांकि तीनों ही विद्यालयों में व्यवस्थाएं सही पाई गईं।

उधर, निजी शिक्षण संस्थान के जिलाध्यक्ष अर्जुन देवलिया ने आरोप लगाया कि बैठक जिला कलक्टर की अध्यक्षता में होनी थी। इसके कारण करीब 470 विद्यालयों के संचालक अपनी शिकायते लेकर आए थे। लेकिन कलक्टर के नहीं आने से यह बैठक मात्र खानापूर्ति बनी। किसी भी अधिकारी ने किसी की समस्या तक नहीं सुनी। आरटीई के लाखों रुपए बकाया चल रहे है। इसके बारे में कोई सुनने वाला तक नहीं है। हर बार समस्या रखते है, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिलता है। ऐसे में निजी स्कूल संचालकों में इसे लेकर काफी रोष है। सोमवार को इसे लेकर जिला कलक्टर को भी ज्ञापन दिया जाएगा।