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गलत जांच कर झूठे मुकदमे में वृद्ध को पकड़ा, प्रतापनगर थानाप्रभारी गोदारा निलंबित

- मांडल एसएचओ रहते की थी कारवाई, मददगार एएसआई सीपी भी निलंबित - अजमेर रेंज आईजी ने दोनों का मुख्यालय टोंक पुलिस लाइन किया - चार्जशीट मिलेगी, विभागीय जांच भी होगी

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गलत जांच कर झूठे मुकदमे में वृद्ध को पकड़ा, प्रतापनगर थानाप्रभारी गोदारा निलंबित

गलत जांच कर झूठे मुकदमे में वृद्ध को पकड़ा, प्रतापनगर थानाप्रभारी गोदारा निलंबित

अजमेर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक रूपिन्द्रसिंघ ने प्रतापनगर थानाप्रभारी राजेन्द्र गोदारा और मांडल थाने के सहायक उपनिरीक्षक चन्द्रप्रकाश (सीपी) को निलंबित कर दिया। दोनों का मुख्यालय टोंक पुलिस लाइन किया गया है। करीब तीन साल पूर्व मांडल थानाप्रभारी रहते गोदारा ने धोखाधड़ी के मामले में गलत जांच की और झूठे मुकदमे में वृद्ध व्यक्ति को जेल भेजा था। इस मामले में एएसआई अनुसंधान अधिकारी था। आईजी ने मामले को गंभीर मानते दोनों को निलंबित किया। इनको चार्जशीट दी जाएगी। विभागीय जांच भी होगी। कार्रवाई से भीलवाड़ा पुलिस महकमे में हड़कम्प मच गया।


जमीन विवाद: फर्जी दस्तावेज पेश करने का आरोप
आईजी सिंघ् को मांडल निवासी रामजस टांक ने शिकायत दी थी। रामजस और उसके पडोसी किशन सोनी में जमीन विवाद है। किशन और उसके भाई का कॉम्प्लेक्स बन रहा था। वर्ष-2020 में किशन सोनी ने रामजस और उसके परिवार के खिलाफ मांडल थाने में मामला दर्ज कराया था। किशन ने आरोप लगाया था कि उसके स्वामित्व की पांच फीट जमीन दस्तावेज में कांटछांट कर रामजस ने हड़प ली। आपत्ति जताने पर रामजस और उसकी पत्नी मंजूलता और बेटी ने दीवार गिरा दी और बदसलूकी की। जमीनी दस्तावेज में कांटछांट कर उसे थाने और एसडीएम कार्यालय में पेश किए। तत्कालीन मांडल थानाप्रभारी राजेन्द्र गोदारा ने किशन की रिपोर्ट पर मुकदमा दर्ज किया और अनुसंधान अधिकारी एएसआई चन्द्रप्रकाश था।

एक माह जेल में रहना पड़ा, कॉम्प्लेक्स भी बनवा दिया
पुलिस अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने किशन की रिपोर्ट पर वर्ष-2021 पर रामजस को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पीछे से किशन का कॉम्प्लेक्स का निर्माण पूरा करा दिया, जबकि गिरफ्तारी से पहले रामजस की शिकायत को परिवाद में दर्ज किया। थाने, सीओ कार्यालय तथा एसपी ऑफिस में शिकायत की, लेकिन रामजस की सुनवाई नहीं हुई। एक माह से अधिक समय जेल में रहने के बाद जमानत पर छूटे रामजस ने आईजी को आपबीती बताई। मामले की दोबारा जांच में गड़बड़ी उजागर हुई।

फोटोकॉपी को माना जांच का आधार
किशन ने रामजस के प्लॉट के पट्टे की फोटो प्रति पेश कर आरोप लगाया कि इसमें काटछांट हुई। दावा किया कि फोटो प्रति सूचना के अधिकार के तहत सरकारी कार्यालय से ली गई है। जाली दस्तावेज के मामले की जांच उपनिरीक्षक या इससे उच्च स्तर का अधिकारी कर सकता है। इसके बावजूद जांच एएसआई को दी। मूल दस्तावेज के बजाय फोटो प्रति पर तफ्तीश पूरी हुई। फोटोकॉपी की एफएसएल जांच भी नहीं कराई। फाइल पर रामजस के पूरे परिवार को आरोपी बता दिया। रामजस ने बयान में बताया भी था कि यह पट्टा उसका नहीं है। उसका पट्टा बैक में गिरवी रखा है, उसे देखा जा सकता है। इसके बाद भी पुलिस ने उसकी एक न सुनी। उसके गिरफ्तार होते ही विवादित स्थल पर पड़ोसी ने भवन बना लिया। आईजी के आदेश पर नए जांच अधिकारी ने बैंक से मूल पट्टा प्राप्त किया तो फर्जी दस्तावेज की बात गलत पाई गई।

कल सम्मान किया, आज गाज गिरी
राजस्थान पुलिस स्थापना दिवस पर रविवार को भीलवाड़ा पुलिस लाइन में हुए समारोह में उल्लेखनीय कार्य के लिए पुलिस अधीक्षक आदर्श सिधू ने सीआई गोदारा का सम्मान किया था। उनको बैग और डायरी से सम्मानित किया था।