18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

हड़ताल के बीच दोगुनी हुई कीमत, चोरी-छिपे हो रही क्रेशर गिट्टी की सप्लाई

- बिना रॉयल्टी और टीपी के ट्रैक्टरों में आ रही गिट्टी, आरसीएम प्लांट के मिलर भी चलने लगे

2 min read
Google source verification
Price doubled amid strike, crusher ballast being supplied secretly

Price doubled amid strike, crusher ballast being supplied secretly

प्रदेश में चल रही हड़ताल के बीच भीलवाड़ा के कुछ व्यापारी बिना रॉयल्टी व टीपी के चोरी-छिपे क्रेशर गिट्टी की सप्लाई कर रहे है। रेडी मिक्स कंक्रीट (आरसीएम) प्लांट से भी चलने लगे है। लेकिन यह दोगुनी कीमत पर माल की सप्लाई कर रहे है। इससे लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

शहर के मुख्य चौराहा गोल प्याऊ चौराहे पर शुक्रवार सुबह 10 बजे क्रशर गिट्टी का एक ट्रैक्टर खाली होता पाया गया। जिसके पास किसी प्रकार के कागज, टीपी और जीएसटी का बिल नहीं था। ट्रैक्टर ड्राइवर से पूछा तो वह गिट्टी खाली करके भाग निकला। इसी प्रकार ओवरब्रिज में ट्रैक्टर ट्रॉली में गिट्टी भर कर ले जा रहे चालक से रोककर पूछा तो बताया कि वह दरीबा से गिट्टी लेकर आया है।

आरसीएम प्लांट के मिलर भी चलने लगे

शहर में कुछ जगह पर रेडी मिक्स कंक्रीट (आरसीएम) प्लांट के मिलर भी चलने लगे है। यह सुभाषनगर, आरके कॉलोनी राजीव गांधी पार्क के पास तथा अन्य स्थानों पर नजर आए है। इस सम्बंध में क्रेशर संगठन से जानकारी की तो उनका कहना था कि कुछ गलत फहमी के कारण कुछ लोगों ने वाहन चलाए थे। जबकि लोगों को आवश्यकता होने पर दोगुनी कीमत पर गिट्टी व मिलर से माल की आपूर्ति कर रहे है।

शहर में होने लगे काम बंद

शहर में गिट्टी को लेकर भारी किल्लत चल रही है। लोग कालाबाजारी कर रहे है। रात में बजरी की तरह गिट्टी भी डाली जा रही है। एक गिट्टी का ट्रैक्टर आम दिनों में तीन हजार रुपए में खाली होती है। उसकी शुक्रवारकको कीमत पांच हजार रुपए पहुंच गई। मिलर के भी 30 हजार के स्थान 35 से 40 हजार रुपए लिए जा रहे है। भीलवाड़ा क्रेशर एवं चुनाई पत्थर संघ अध्यक्ष अनिल कुमार सोनी का कहना है कि संगठन के सभी क्रेशर व खदाने बंद है। जहां से किसी तरह का उत्पादन एवं माल का लदान नहीं हो रहा है। अगर गिट्टी का कोई ट्रैक्टर शहर में खाली हुआ है तो वह किसी अवैध क्रेशर से आया होगा। खान विभाग के अधिकारियों को बिना टीपी वाले ट्रैक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।