
प्री-वेडिंग शूट, म्यूजिकल फेरे और बेबी शॉवर सामाजिक विकृति, सादगी अपनाएं
आधुनिक जीवनशैली, मोबाइल, सोशल मीडिया और दिखावे की अंधी दौड़ ने समाज में नई बुराइयों को जन्म दे दिया है। लोग एक-दूसरे की देखा-देखी अनावश्यक खर्च और आडंबरपूर्ण आयोजनों में लिप्त हो रहे हैं। इससे सामाजिक संतुलन बिगड़ रहा है। म्यूजिकल फेरे, बेबी शॉवर और प्री-वेडिंग शूट जैसी तेजी से पनप रही परंपराएं हमारी संस्कृति और सादगीपूर्ण जीवनशैली के विपरीत हैं। यह एक सामाजिक विकृति है। यह बात मुनि प्रणीत सागर ने शुक्रवार सुबह आरके कॉलोनी स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा में कही। ग्रीष्मकालीन वाचना के दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को संबोधित करते हुए मुनि ने दिखावे की प्रवृत्ति से दूर रहकर संयम और धर्मपरायणता अपनाने का आह्वान किया।
मुनि प्रणीत सागर ने सम्यक दर्शन के महत्व को समझाते हुए कहा कि संसार की उथल-पुथल के बीच अपने भावों में शांति बनाए रखना ही वास्तविक साधना है। विरोधियों और विपरीत परिस्थितियों के प्रति समभाव रखना सम्यक दर्शन का प्रमुख लक्षण है। उन्होंने सम्यक दर्शन के चार प्रमुख गुणों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
मुनि प्रणीत सागर समाज की वर्तमान दिशा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज लोग देव, शास्त्र और गुरु को भी अपनी सुविधा और दिखावे का माध्यम बना रहे हैं, जबकि इनका मूल उद्देश्य आत्मा की शुद्धि और मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ना है। मुनि ने समाज के आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों की सुरक्षा व सहयोग के लिए अभय कोष बनाने की सख्त आवश्यकता पर बल दिया।
Published on:
02 May 2026 09:03 am
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