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पढ़ाई में दिक्कत हो या चाहिए दवा, हर किसी की मदद को तैयार

भीलवाड़ा. स्कूल की फीस चुकाने में सक्षम नहीं हो या कमजोर आर्थिक हालात के चलते इलाज नहीं करा पा रहा हो व चल-फिर नहीं सकता लेकिन बैशाखी या ट्राई साइकिल खरीदने की क्षमता नहीं हो तो हर किसी के जेहन में कमला चौधरी का नाम उभरता है।
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भीलवाड़ा

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Suresh Jain

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Updated: 21 Aug 2022, 9:31 AM IST

पढ़ाई में दिक्कत हो या चाहिए दवा, हर किसी की मदद को तैयार

पढ़ाई में दिक्कत हो या चाहिए दवा, हर किसी की मदद को तैयार

भीलवाड़ा. स्कूल की फीस चुकाने में सक्षम नहीं हो या कमजोर आर्थिक हालात के चलते इलाज नहीं करा पा रहा हो व चल-फिर नहीं सकता लेकिन बैशाखी या ट्राई साइकिल खरीदने की क्षमता नहीं हो तो हर किसी के जेहन में कमला चौधरी का नाम उभरता है। भीलवाड़ा के शास्त्रीनगर की 68 वर्षीय कमला चौधरी निर्धन व असहाय लोगों के सहारे का दूसरा नाम है। यहां शिक्षा व चिकित्सा सेवा में चौधरी अग्रणी नाम है।


कमला का कहना है, समाज सेवा की प्रेरणा मुझे 22 साल पहले शांति भवन में धार्मिक कार्यक्रम से मिली। तब से जो कुछ बन पड़ता है, कर रही हूं। जरूरतमंदों की मदद को ग्रन्थों में भी पुण्य माना गया है। समाज के उच्च वर्ग को इनकी मदद के लिए आगे आना चाहिए।

17 चिकित्सा शिविर, दस हजार लोगों को मिला इलाज
कमला चौधरी ने पिछले बारह साल में 17 चिकित्सा शिविर लगवाए, जहां कमजोर वर्ग के लोगों का निशुल्क इलाज किया गया। जयपुर की मोबाइल सर्जिकल यूनिट के माध्यम से लगाए शिविरों का फायदा करीब दस हजार लोगों को मिला। पांच हजार से अधिक रोगियों के नि:शुल्क ऑपरेशन भी कराए। इनमें कई जटिल ऑपरेशन भी थे। शिविर भीलवाड़ा, शाहपुरा, चित्तौड़गढ़ व अजमेर में भी लगवाए।
स्कूल गोद लिए, विद्यार्थियों को पहुंचाई मदद
चौधरी ने जिले के कई स्कूल गोद लिए। जरूरतमंद विद्यार्थियों को स्कूल ड्रेस, जर्सियां, फर्नीचर मुहैया कराए। खाने-पीने का इंतजाम भी करती हैं। उम्र बढ़ने के बाद भी समाज सेवा के प्रति जज्बा कम नहीं हुआ। चौधरी ने स्मॉइल फाउण्डेशन का भी जनसेवा में सहयोग लिया। चौधरी हर माह की पहली तारीख को असहाय परिवारों को राशन वितरण कराती हैं। होली व दिवाली जैसे मौकों पर राशन किट बंटवाती हैं।

दिव्यांगों का सहारा

दिव्यांगों की सेवा में भी चौधरी ने अहम भूमिका निभाई। विशेष शिविर लगाए। सैकड़ों दिव्यांगों को ट्राइसाइकिल, बैशाखी, श्रवण यंत्र आदि मुहैया कराए। बच्चों में धार्मिक संस्कार एवं गुरु के प्रति समर्पण के लक्ष्य से कई जगह जैन पाठशालाएं संचालित की। चौधरी गोवंश की सेवा में भी पीछे नहीं है। साठ से अधिक गोशालाओं में एक-एक ट्रक खाखले का भिजवाया। चौधरी को कई संस्थाएं सम्मानित कर चुकी है।