22 अप्रैल 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पृथ्वी दिवस विशेष: खेतों को निगल रहीं अवैध कॉलोनियां, कागजों में लहलहा रहे 45 लाख पौधे

भीलवाड़ा में हरियाली की जगह कंक्रीट का जाल, नगर विकास न्यास की मेहरबानी से सिकुड़ रही धरती

2 min read
Google source verification
Earth Day Special: Illegal colonies are swallowing farmland, 4.5 million trees are flourishing on paper.

पृथ्वी दिवस विशेष: खेतों को निगल रहीं अवैध कॉलोनियां, कागजों में लहलहा रहे 45 लाख पौधे

सुरेश जैन

बुधवार को जब दुनिया पृथ्वी दिवस मना रही होगी, तब औद्योगिक नगरी भीलवाड़ा पर्यावरण की अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही होगी। शहर और इसके आस-पास अब हरियाली के लिए जमीन ही नहीं बची है। खेतों को खत्म कर अवैध कॉलोनियां काटी जा रही हैं और विडंबना यह है कि नगर विकास न्यास भी इन्हें धड़ल्ले से स्वीकृति जारी कर रहा है। दूसरी ओर पौधरोपण के नाम पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च कर केवल कागजी जंगल खड़े किए जा रहे हैं, जिसका नतीजा है कि शहर का तापमान लगातार खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है।

आंकड़ों की बाजीगरी: कहां गए 45 लाख से ज्यादा पौधे

हर साल मानसून में पौधरोपण के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर पौधे नजर नहीं आते। पिछले साल का आंकड़ा देखें, तो जिले में हरियाली के नाम पर बड़ा कागजी खेल हुआ। पौधरोपण के लिए 63 सरकारी विभागों को शामिल किया। इनके अलावा औद्योगिक इकाइयां तथा औद्योगिक संगठनों को पौधरोपण के लिए बाध्य किया गया। इसके चलते जिले में कुल लगाए 45 लाख 72192 पौधा लगाने का दावे किए जा रहे हैं। इसमें व्यक्तिगत स्तर पर 1 लाख 68321 तथा ब्लॉक स्तर पर 44 लाख 3 871 पौधे लगाए गए। सवाल यह है कि इतने भारी-भरकम बजट और लाखों पौधों के रोपण के बाद भी भीलवाड़ा में हरियाली क्यों गायब है? जमीन पर पौधे जिंदा नहीं बचे हैं और केवल फाइलों में अभियान सफल हुआ।

कंक्रीट के जंगल और बढ़ता तापमान

अवैध कॉलोनियों की बाढ़ के कारण शहर के आस-पास खाली जमीन का अकाल पड़ गया है। कृषि भूमि को कंक्रीट के जंगलों में तब्दील किया जा रहा है। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और नए पौधों के न पनपने के कारण पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है। हर साल राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से सरकारी स्कूलों में पृथ्वी दिवस रस्मी तौर पर मनाया जाता है। जागरुकता के बड़े-बड़े दावे होते हैं, रैलियां निकाली जाती हैं, लेकिन इन आयोजनों पर कोई ठोस अमल नहीं हो रहा।

सभी को निभानी होगी जिम्मेदारी

पृथ्वी दिवस पर हम सरकारी स्कूलों में जागरुकता कार्यक्रम कर रहे हैं। जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान को रोकने के लिए सिर्फ कागजी पौधरोपण से काम नहीं चलेगा। लगाए गए पौधों को जीवित रखना और पेड़ों को कटने से बचाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। मंडल अपने स्तर पर लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन इसके लिए आमजन और अन्य विभागों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है।

- दीपक धनेटवाल, क्षेत्रीय अधिकारी, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल