
विकास की भेंट चढी जन सुरक्षा: भीलवाड़ा के चौराहों पर डरा रहा सुन्दरता का दिखावा
भीलवाड़ा शहर को सुंदर बनाने के नाम पर नगर निकायों की ओर से लाखों रुपए खर्च कर बनाए गए चौराहे अब शहरवासियों के लिए खौफ का सर्कल बन गए हैं। इन खतरनाक चौराहों से गुजरने में आमजन को डर लगने लगा है। स्थिति यह है कि आए दिन लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं और वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। कृषि मंडी, पुर रोड, मंगल पांडे सर्कल, कुंभा सर्कल और अहिंसा सर्कल, महाराणा प्रताप सर्कल के आस-पास का इलाका डेंजर जोन में तब्दील हो चुका है। इसके बावजूद नगर निगम, नगर विकास न्यास प्रशासन और यातायात पुलिस कुंभकर्णी नींद में सोए हैं।
शहर के सौंदर्यीकरण के तहत निकायों ने शहर के हर प्रमुख चौराहे पर सर्कल का निर्माण तो कर दिया, लेकिन इसका फायदा शहरवासियों को मिलने के बजाय परेशानी का सबब बन गया है। वाहन चालकों और स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि रात के समय इन सर्कल पर स्थिति और भी भयावह हो जाती है। चौराहों की डिजाइन इतनी त्रुटिपूर्ण है कि सामने से अचानक वाहन आ जाने पर चालकों को ब्रेक लगाने तक का मौका नहीं मिलता। लाखों रुपए खर्च किए जाने के पीछे आमजन का स्पष्ट मानना है कि शहर में विकास के नाम पर केवल अपने स्वार्थ साधे गए हैं, जनता को राहत देने का कोई प्रयास नहीं हुआ।
पटरी पार तेजी से विस्तार ले रहे आजाद नगर के हालात भी इन चौराहों ने बिगाड़ दिए हैं। इलाके के मध्य स्थित कुंभा सर्कल इसका जीता-जागता उदाहरण है। हालांकि इसकी चौड़ाईसड़क के अनुसार है, लेकिन इसकी ऊंचाई इतनी अधिक कर दी गई है कि दूसरी तरफ से आने वाले वाहन नजर ही नहीं आते। यह ब्लाइंड स्पॉट हर दिन किसी न किसी छोटे-बड़े एक्सीडेंट का कारण बन रहा है।
नगर नियोजन विभाग के सख्त नियम हैं कि यातायात के सुचारू संचालन और सुरक्षा के लिए किसी भी सर्कल के 20 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या ठेला नहीं होना चाहिए। लेकिन भीलवाड़ा में स्थिति इसके बिल्कुल उलट है। शहर के हर प्रमुख चौराहे पर रोड किनारे अवैध चौपाटी सजी हुई है। ठेले वालों ने आधी से ज्यादा सड़क घेर रखी है। भीड़भाड़ और सड़क संकरी होने के कारण इन सर्कल पर हमेशा दुर्घटनाओं का भय मंडराता रहता है।
Published on:
26 Mar 2026 09:07 am
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