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रंगने की जिद में खा रहे थे कोड़े

200 साल की परंपरा : रंगतेरस पर जीनगर समाज ने खेली होली
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Pugs were being used in color in bhilwra

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भीलवाडा।


पुरुष महिलाओं को रंगने की जिद में थे तो महिलाएं खुद को बचा रही थी। बचाव में पुरुषों पर कोडे़ बरसा रही थी। पुरुष खुद को कोड़ों की मार से बचाते बड़े कड़ाहों में घुला रंग बाल्टियों व मगों से महिलाओं पर फेंक रहे थे। महिलाएं पुरुषों को कहाड़ों से दूर खदेडऩे में जुटी थी। ढोल-नगाड़े बज रहे थे। फाग गाया जा रहा था। हर उम्र का शख्स मस्ती व उल्लास के मूड में था। नजारा बुधवार को शहर की गुलमंडी व सर्राफा बाजार क्षेत्र में रंगतेरस को दिखा। अवसर था, जीनगर समाज की कोड़ामार होली का, जो २०० वर्ष पुरानी परम्परा है। इसे देखने आसपास बड़ी संख्या में लोग थे।

चले चार राउंड : महिलाएं रही विजयी
नगर परिषद के दमकल ने कड़ाह में पानी भरा। पुलिस प्रशासन मुस्तैद था। सड़क पर रंग भरे कड़ाह और आसपास खड़ी महिलाएं के पुरुषों पर कोड़े बरसाने का नजारा देखने छतों पर लोग खड़े थे। चार राउंड में होली खेली गई। शर्त थी कि महिलाएं जहां कड़ाहों से रंग समाप्त नहीं होने देगी व पुरुषों को उसे पूरी तरह खाली करना था। जैसे ही कड़ाह से रंग भरा पानी मग में भरने और महिलाओं पर फेंकने के लिए पुरुष आगे बढ़ते महिलाएं पूरी ताकत से उन पर कोड़े बरसाती और उन्हें दूर खदेड़ देती। चार राउंड बाद महिलाएं विजयी रही। शहर के कोने-कोने से समाजजन आए। नवविवाहितों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। इसके बाद महिलाएं व पुरुष नाचते-गाते समाज के भवन पहुंचे। जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं सामूहिक भोज हुआ। कैलाश खत्री, दुर्गालाल सांखला, मुकेश सांखला, भैरूलाल खत्री, मुकेश सिरोया, अशोक खत्री आदि उपस्थित थे।