
जीएसटी के बाद प्रदेश के उद्यमियों को राजस्थान प्रोत्साहन निवेश योजना (रिप्स) में लाभ नहीं मिल पाया
भीलवाड़ा।
जीएसटी के बाद राजस्थान का पहला बजट 12 फरवरी को विधानसभा में पेश होगा। इस पर आमजन के साथ वस्त्रनगरी के उद्यमियों की नजर होगी। मुख्य रूप से जीएसटी के बाद प्रदेश के उद्यमियों को राजस्थान प्रोत्साहन निवेश योजना (रिप्स) में लाभ नहीं मिल पाया। उद्यमी चाहते हैं कि रिप्स जीएसटी में शामिल हों। साथ ही पानी, बिजली, जमीन के साथ ही अन्य राहत भी मिले।
प्रदेश में टेक्सटाइल क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए शुरू रिप्स के तहत उद्यमियों को उद्योग में विस्तार या नई इंडस्ट्री पर वैट के बदले ब्याज अनुदान तथा नई मशीनों पर ब्याज पर छूट तथा नव रोजगार सृजन पर ब्याज अनुदान की योजना थी। मेवाड़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स के महासचिव आरके जैन का मानना है कि यह योजना जीएसटी लागू होने के साथ ही ठप हो गई। योजना को जीएसटी में शामिल किया जा सकता है। ताकि उद्यमियों को जीएसटी चुकाने के बदले राहत मिल सके।
यह चाहते हैं कारेबारी
भीलवाड़ा टेक्सटाइल ट्रेड फेडरेशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अतुल शर्मा ने बताया कि उद्योग चलाने के लिए उद्यमी पावर ट्रेडिंग करते है पर सरकार ने बिजली दर बढ़ा दी। इस पर छूट की उम्मीद है। सोलर पावर लगाने के लिए विशेष छूट मिले। उद्योगों के लिए पानी को लेकर भी सरकार नई योजना बनाएं।
सिंगल विंडो सिस्टम कारगर हो। टेक्सटाइल विभाग अलग से खुले।
डीएलसी दर पर सरकार का सीधा नियंत्रण हों। प्रोसेस हाउस दूषित पानी को शुद्ध करने के लिए आरओ लगाएं।
इस पर सरकार ने अनुदान देने की घोषणा की है, लेकिन अमल शुरू नहीं हो सका।
जमीनों की डीएलसी दर का निर्धारण बाजार दरों के अनुरुप हों।
प्रदेश में प्रदूषण मुक्त हो उद्योग
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश में पेटकोक पर रोक लगा दी। उद्यमियों को उम्मीद है कि सरकार गैस आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए योजना को मूर्त रूप दे सकती है। इनका मानना है कि प्रदेश में गैल इण्डिया की ओर से कोटा से भीलवाड़ा के कांदा तक गैस पाइप लाइन डाल रखी है। कांदा गैस का टर्मिनल हब है। इस योजना का उद्योगों को लाभ नहीं मिल रहा है क्योंकि गैस महंगी पड़ रही है। उद्यमियों की मांग है कि इसका उपयोग के लिए सरकार ब्याज अनुदान योजना जारी करे। कई उद्योगों में पेटकोक आधारित बायलर हैं, जिन्हें गैस आधारित के लिए बजट का भी प्रावधान हो।
उद्यमियों को नहीं मिल रही जमीन
मोड़ का निम्बाहेड़ा में सिरेमिक पार्क के लिए एक कम्पनी ने आवेदन किया पर सरकार तय नहीं कर पाई कि यह जमीन किस संस्था को दें। इसके चलते सिरेमिक पार्क का सपना चार साल से अधूरा पड़ा है। टेक्सटाइल पार्क के लिए जमीन नहीं मिल पा रही है। करणपुरा में रीको की जमीन है, लेकिन खुलासा नहीं हो पा रहा है कि वहां पार्क लगेगा या अन्य उद्योग। सोनियाणा (चित्तौडग़ढ़) में रीको की 500 बीघा जमीन है, जिसे कुछ साल भीलवाड़ा के उद्यमी लेने को तैयार थे, लेकिन रीको ने भूखण्ड दरें बढ़ा दी।
मण्डी शुल्क से मिले छुटकारा
जीएसटी के बाद भी राजस्थान में खाद्यान्न व्यापारियों से 1.60 प्रतिशतमण्डी शुल्क लिया जा रहा है। अन्य राज्यों ने इसे खत्म कर दिया। इससे राज्य सरकार को करीब 250 करोड़ का राजस्व मिलता है। मण्डी व्यापारी शिव गगरानी का कहना है कि इस बार बजट में मण्डी शुल्क को हटाया जाना चाहिए।
Updated on:
08 Feb 2018 11:12 pm
Published on:
08 Feb 2018 02:36 pm

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