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गांवों के नाम एेसे कि बताने में शर्माते हैं लोग, फूलन, आंट, आंटी, रंगीली और उंदरखेड़ा भी हैं नाम

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जसराज ओझा/भीलवाड़ा। कहते हैं नाम में क्या रखा है, लेकिन सच यह भी है कि नाम ही किसी व्यक्ति या स्थान की पहचान होता है। जिले में कई गांवों के नाम एेसे हैं, जो लिखने या बोलने में अटपटे या यूं कहें कि रोचक है।

कुछ गांवों के नाम तो एेसे हैं जिनको बोलने-बताने तक में लोग शरमाते हैं। हाल ही सरकार ने भी प्रदेश के चार गांवों के नाम बदले हैं। भीलवाड़ा जिले के भी कई गांव हैं, जिनके नाम बदलने का प्रस्ताव सरकार को भेजा हुआ है।

रायपुर के पास एक गांव का नाम लडक़ी है। गंगापुर क्षेत्र में रंगीली, लडक़ी, मेहंदी भी गांव हैं। करेड़ा क्षेत्र में रेल व बिजौलियां में सूंठी, बांका, भूती, फूलन, सरकी कुंडी, नीमड़ीगवा, पापड़बड़, भोपी की रेट भी गांव का नाम है। जिले में राजस्व गांवों की कुल संख्या 1934 से अधिक हैं।


सांड भी हैं गांव का नाम
मांडलगढ़ क्षेत्र में ऊंदरों का खेड़ा, बदनपुरा, कोतवाल का खेड़ा, मीठा, गोठ, गोठड़ा गांव हैं। जहाजपुर क्षेत्र में बिहाड़ा में जीरा, गलिया, रोजड़ी, अड़ीमल का खेड़ा, एकलमेड़ी, उलेला, खाना का खोहला, उन्हाली का बाडिय़ा, बदनौर में ठूमिया, बाण की कांकर, मोटी, ऊर्जा का खेड़ा आदि नाम रोचक हैं। रायपुर के झड़ोल में डांगड़ा-डांगड़ी, रामा घायलों का खेड़ा आदि गांव हैं। बिजौलियां में तीखी, आंट, आंटी, मोचडि़यों का खेड़ा, सांड, देवली की नून, मीठा व छूर का कोह, चक-चावर, लाडीजी का खेड़ा, बखेरा, रोजड़ी, छांटिया, बिंदी, लून्दा का झोंपड़ा, मायला-पोलिया, बारला-पोलिया गांव हैं।

ग्रामीणों को पसंद नहीं आया तो बदल दिया
मांडल क्षेत्र के एक गांव का नाम भीलड़ी है। ग्रामीणों ने नाम रामनगर रख लिया है। अब प्रयास है कि रेवेन्यू रिकॉर्ड में भी रामनगर दर्ज हो जाए। इसी तरह लांगरों का खेड़ा का नाम अक्षयपुरा करने की प्रक्रिया चल रही है।

गांव के नाम पर आपत्ति है, तो ग्राम पंचायत की बैठक में संशोधन का प्रस्ताव लेकर उपखंड अधिकारी के माध्यम से राजस्व विभाग को भिजवा सकते हैं।
शुचि त्यागी, जिला कलक्टर, भीलवाड़ा