
रामपाल शर्मा ने भाजपा का दामन थामा
Rampal Sharma joins BJP विधानसभा चुनाव में भीलवाड़ा व शाहपुरा जिले में सातों सीट गंवाने के बाद दो माह में कांग्रेस को फिर दूसरा बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामपाल शर्मा रविवार को भाजपा में शामिल हो गए। वही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य एवं शाहपुरा जिले की राजनीति में सक्रिय अनिल व्यास ने भी कांग्रेस का दामन छोड़ दिया। शर्मा के साथ दोनों जिलों के 18 सरपंच समेत कुल 27 अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा में शामिल हुए।
राजनीतिक जानकार मानते है कि वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव व विधानसभा की सातों सीटें हार चुकी कांग्रेस पर मानसिक असर पड़ सकता है।
पहले दिया इस्तीफा, फिर भाजपा में
पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष शर्मा मौजूदा पीसी मेम्बर है। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को दिया है। इसमें इस्तीफा देने का कोई कारण नहीं बताया है। उन्होंने लिखा कि कांग्रेस सदस्य सहित राजस्थान कांग्रेस कमेटी के साथ सभी पदों से स्वैछिक त्याग पत्र देता हूं।
मोना शर्मा ने भी छोड़ी पार्टी
शर्मा जिला युवक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रहे है। शर्मा नगर विकास न्यास अध्यक्ष के साथ ही जिला कॉपरेटिव चेयरमैन रहे चुके है। वर्ष 2019 में भीलवाड़ा लोकसभा सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी रहे। मांडल विधानसभा चुनाव भी लड़े। दोनों चुनाव में वह नहीं जीत सके। उनकी धर्म पत्नी पत्नी मोना शर्मा राजस्थान कांफेड की चेयरमैन व सहकारी उपभोक्ता भंडार की चेयरमैन रहे चुकी है। उन्होंने ने भी कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता त्याग दी है।
राम में बिगड़ा तालमेल....
सियासत के गलियारे में चर्चा है कि शर्मा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं पूर्व भीलवाड़ा सांसद सीपी जोशी के करीबी माने जाते थे। एक दशक पूर्व तक पूर्व मंत्री रामलाल जाट के भी नजदीकी थे। लेकिन जाट व शर्मा के बीच बिगड़ा तालमेल कांग्रेस के दिग्गजों के प्रयास के बावजूद नहीं बैठ सका। ऐसे में शर्मा ने जिले की राजनीति से ध्यान हटा कर पूरा जोर राजस्थान क्रिकेट संघ व जिला क्रिकेट संघ में लगा रखा था। वहीं अनिल व्यास भी जिला तैराकी संघ के अध्यक्ष रहते हुए राजस्थान तैराकी संघ व ओलंपिक संघ से जुड़े हुए है।
आरसीए पर टिकी नजर
शर्मा आरसीए के कोषाध्यक्ष रहे चुके है और अभी अध्यक्ष व सचिव की कुर्सी पर उनकी नजर टिकी हुई है। । जिला क्रिकेट संघ के पूर्व सचिव रहने के बाद वह अभी संघ के अध्यक्ष की कमान संभाले हुए है। इसी प्रकार कई खेल संघों से भी उनका नाता जुड़ा है। वह कांफेड पर फिर दांव खेल सकते है।
बदल गए हालात
भीलवाड़ा जिले की राजनीति में एक दौरे ऐसा था, जब भाजपा से कांग्रेस में शामिल होने का दौर चला था। लेकिन अब सियासत के गलियारे की तस्वीर बदली हुई है। जानकार बतलाते है कि दिवंगत भाजपा नेता एवं विधायक पराक्रम सिंह कांग्रेस में आए और सरपंच बने। भाजपा से ही कन्हैयालाल धाकड़ जिला प्रमुख बने और बाद में कांग्रेस में आ गए। इसी प्रकार मधू जाजू व ललिता समदानी भाजपा में रहते हुए नगर परिषद सभापति बनी। जाजू ने भाजपा छोड़ी और समदानी को पार्टी ने निष्कासित किया। दोनों कांग्रेस में आ गई। दिवंगत पूर्व विधायक शिवजी राम मीणा जद से कांग्रेस में शामिल हुए और फिर वापस भाजपा में आ गए।
मोदी की नीतियों से प्रभावित
छात्र नेता एवं गेगा का खेड़ा सरपंच शंकर लाल शर्मा का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीतियों से हम सब प्रसन्न थे। कांग्रेस ने राममंदिर में रामलला प्राण प्रतिष्ठा समारोह का जो न्योता ठुकराया, उससे हम सब आहत हुए। इस लिए भीलवाड़ा व शाहपुरा जिले से 18 सरपंच समेत 27 जने कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए है।
कार्यकर्ता बनकर करेंगे काम
मैं, कार्यकर्ता बनकर आया हूं, मुझे टिकट चाहे ना ही कोई पद। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रीति एवं नीति में हमें विश्वास है। हम सनातनी है। भाजपा को मजबूत करेंगे, डबल इंजन की सरकार से जिले के विकास में भागीदारी निभाएंगे। जल्द ही दोनों जिले के कई कार्यकर्ता और भाजपा में शामिल होंगे।
- रामपाल शर्मा
Published on:
11 Mar 2024 01:27 pm
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