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भीलवाड़ा में रांधापोआ से महकी रसोई, कल गुलाल-अबीर से सरोबार होगा शहर

- बाजारों में सजी रंगों की दुकान, घरों में व्यंजन बनाने का काम शुरू - चावल और मक्का का बनेगा ओलिया, पापड़ और पपड़ी से होगी मनुहार - खरीदारों की भीड़ जुटी, घर-घर व्यंजनों की आने लगी महक

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भीलवाड़ा में रांधापोआ से महकी रसोई, कल गुलाल-अबीर से सरोबार होगा शहर

भीलवाड़ा में रांधापोआ से महकी रसोई, कल गुलाल-अबीर से सरोबार होगा शहर

शीतलाष्टमी पर रंगोत्सव को लेकर बाजार तैयार हो गया है। टेक्सटाइल सिटी भीलवाड़ा में बुधवार को रंगों से धमाल मचेगी। रंगोत्सव को लेकर उत्साह का माहौल है। शीतलाष्टमी पर बासेड़ा को देखते मंगलवार को महिलाएं रांधापोआ कर रही है। इससे व्यंजनों की महक से रसोई महकने लगी है। शीतलाष्टमी से एक दिन पूर्व व्यंजन और भोजन तैयार किए जाते हैं। इन व्यंजनों और भोजन काे ही रांधापोआ कहा जाता है। हालांकि महिलाओं ने सोमवार से ही व्यंजन बनाने शुरू कर दिए थे। घर-घर व्यंजनों की महक से महक रहा है। शीतलाष्टमी पर चूल्हा नहीं जलता है। शीतला माता का पूजन के बाद एक दिन पूर्व बने भोजन को ही ग्रहण किया जाता है।

उधर, रंगोत्सव को देखते हुए बाजार में सड़क किनारे उत्तरप्रदेश से आए करीगरों ने रंग और गुलाल की फुटपाथ पर दुकान सजा दी है। रंग-बिरंगे गुलाल-अबीर की खरीदारी शुरू हो गई। पिचकारी और गुलाल की भी खूब बिक्री हुई। शीतलाष्टमी पर बुधवार अलसुबह महिलाएं शीतला माता का पूजन करेंगी। उसके बाद होली खेलने का सिलसिला शुरू होगा।

स्थानीय अवकाश कल
जिला कलक्टर आशीष मोदी ने 15 मार्च को शीतलाष्टमी पर सरकारी अवकाश घोषित किया। भीलवाड़ा में शीतलाष्टमी पर जमकर होली खेली जाती है। युवाओं से लेकर बच्चों, महिलाओं और पुरुष एक-दूसरे को रंग लगाकर त्योहार मनाते हैं। चावल और मक्का से बने ओलिया और पापड़ से लोगों की मेहमान नवाजी होती है। मक्की का घाट, मीठा औलिया, पापड़िया, घुझिया, पूड़ी, मिक्स सब्ज़ी, विभिन्न प्रकार की तली रंग-बिरंगी, कचौरिया, परांठे, नारियल की घर बनी मिठाई, विभिन्न सूखी सब्ज़ियां घर-घर बनाई जाती है।