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‘आज के स्टार्स’ का सम्मान मिला तो दूर हुई लेटलतीफी

लेटलतीफी से बदनाम कर्मचारियों को समय की पाबंदी सिखाने के लिए जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक ने नायाब तरीका खोजा है

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Respect was so late was away in bhilwara

Respect was so late was away in bhilwara

नरेन्द्र वर्मा . भीलवाड़ा।

लेटलतीफी से बदनाम कर्मचारियों को समय की पाबंदी सिखाने के लिए जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक ने नायाब तरीका खोजा है। इसके तहत समय पर दफ्तर आने वाले और उस दिन दिया गया काम उसी दिन निपटाकर घर लौटने वाले कर्मचारियों को 'समय के पाबंद-आज के स्टार्स से नवाजा जाता है।

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उनके नाम विभागीय बोर्ड पर लिखते हैं और उनके आगे लिखा जाता है , 'हमें आप पर गर्व है। इस पहल का सकारात्मक परिणाम ये निकला कि देरी से पहुंचने वाले अधिकारी-कर्मचारी भी दफ्तर कार्यालय स्टार्स बनने के लिए समय के पाबंद हो गए है। महाप्रबंधक सिंह का कहना है कि जिला उद्योग केन्द्र जनता की सेवा के प्रति समर्पित विभाग है। एेसे में समय की पालना जरूरी है, अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के लिए ये पहल की गई। समूचे स्टाफ ने इसमें सहयोग किया और इसके बेहतर परिणाम सामने आए है।

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बेअसर होते औचक निरीक्षण से आई सोच

कडे प्रावधान और जिला टीम के सरकारी कार्यालयों के औचक निरीक्षण के बाद भी जिले के अधिकांश विभागों में अधिकारी व कर्मचारी लेटलतीफी से उभर नहीं पा रहे है। सरकारी विभागों में कार्य दिवस में काम के प्रति गंभीरता और समय पर कार्य निपटाने के लिए सिंह ने सकरात्मक पहल अपने विभाग से ही करने की सोची, इस पहल का सकारात्मक असर ये नजर आया कि अन्य सरकारी विभागों में इसकी चर्चा होने लगी है।


'हमें आप पर गर्व है'
जिला उद्योग केन्द्र में 17 सदस्यीय स्टाफ है। अधिकारियों व कर्मचारियों को कार्य दिवस के दौरान निर्धारित समय में पहुंचने और कार्य का निस्तारण समय पर करने के लिए महाप्रबंधक सिंह ने उन्हें प्रोत्साहित करना शुरू किया। एेसे में कर्मचारी भी समय के प्रति पाबंद होने लगे। सिंह ने एेसे कर्मचारियों का उत्साह बढ़ाने के लिए उनका नाम विभागीय सूचना बोर्ड पर 'समय के पाबंद-आज के स्टार्स स्लोगन के साथ लिखना शुरू किया। इतना ही नहीं 'हमें आप पर गर्व है लिखते हुए, उनका सम्मान भी किया। इस अनूठी पहल से देरी से आने वाले अधिकारी व कर्मचारी भी सबक लेने लगे। किसी कारणवश कर्मचारी को देरी हो रही है तो अपने सहकर्मी को फोन कर इसकी सूचना देने लगा। जून के दूसरे सप्ताह में शुरू हुआ नवाचार का असर ये हुआ कि आधा घंटा या एक घंटा देरी से पहुंचने की आदत अधिकारियों व कर्मचारियों में समाप्त हो गई।

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