25 अक्टूबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

नोटबंदी, जीएसटी व ई—वे बिल की विसंगितों के बाद कपड़ा उद्योग पर एक और संकट, बाहरी श्रमिक कर रहे पलायन, ज्यादातर श्रमिक यूपी, बिहार, उड़ीसा के

वस्त्रनगरी में स्पिनिंग, प्रोसेस, वीविंग की करीब 500 से ज्यादा इकाइयों से करीब नौ हजार श्रमिक काम छोड़ गए है
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भीलवाड़ा

•

image

Tej Narayan Sharma

•

Updated: 9 Jul 2018, 2:43 PM IST

retreat External workers in bhilwara

retreat External workers in bhilwara

भीलवाड़ा।

टेक्सटाइल उद्योग नोटबंदी, जीएसटी व इ-वे बिल की विसंगतियों से उभर भी नहीं पाया कि श्रमिकों का संकट बढ़ता जा रहा है। वस्त्रनगरी में स्पिनिंग, प्रोसेस, वीविंग की करीब 500 से ज्यादा इकाइयों से करीब नौ हजार श्रमिक काम छोड़ गए है। यह श्रमिक यूपी, बिहार व उड़ीसा, एमपी के रहने वाले थे। श्रमिकों का तर्क है कि अब उनके मूल गांव में ही रोजगार मिल जाता है। एेसे में कपड़ा उद्योग के सामने श्रमिकों को संकट आ गया।

हालात यह है कि चित्तौड़ रोड व अजमेर रोड स्थित हर फैक्ट्री के बाहर श्रमिक भर्ती चालू है, का बोर्ड लगा है। इसके बावजूद श्रमिक नहीं मिल रहे हैं। टेक्सटाइल उद्यमियों की मानें तो स्थानीय मजदूर बारिश आने या शादी ब्याह का सीजन आते ही अपने खेती बाड़ी के काम में लग जाते है। अभी स्पिनिंग में 150 से 200, प्रोसेस में 80 से 100 तथा वीविंग उद्योगों 60-70 श्रमिकों की हर दिन आवश्यकता है।

दो साल में दो सौ ने काम छोड़ा
चित्तौड़ रोड स्थित नितिन स्पिनर्स के डायरेक्टर दिनेश नोलखा ने बताया, स्पिनिंग में दो साल पहले उत्तर प्रदेश, बिहार व उड़ीसा के श्रमिक काम करते थे। दो साल में करीब 200 श्रमिक काम छोड़कर गांव चले गए। स्थानीय लोगों से काम चला रहे है। नितिन, संगम व कंचन में रोजगार ट्रेनिंग सेन्टर चलाए जा रहे हैं। स्टाइफंड दिया जाता है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद वे काम पर नहीं लौटते है।

स्थानीय लोग बीच में काम छोड़ते हैं
अजमेर रोड स्थित कंचन ग्रुप के डायरेक्टर दुर्गेश बांगड़ ने बताया कि डेनिम प्लांट, विविंग व स्पिनिगं इन प्लांटों में आज भी दो सौ से तीन सौ श्रमिकों की आवश्यकता है। लेकिन जैसे तैसे श्रमिकों की व्यवस्था करके काम चलाते है। अन्य राज्यों से आने वाले श्रमिक काम छोडऩे लगे है। स्थानीय लोग भी खेती बाड़ी के चलते काम छोड़कर चले जाते है। डेनिम प्लांट के प्रबन्धक उमेश ओझा ने बताया कि हर उद्योग में अपनी क्षमता के आधार पर 10 से 15 प्रतिशत श्रमिक कम है।

स्थानीय श्रमिकों का नहीं होता है पूरा ठहराव
स्थानीय युवक इतना मेहनती काम नहीं करते हैं। वे उद्योगों पर रोजगार की तलाश में आते है। मानसून आते ही अपने खेत खलियान को संभालने के लिहए काम छोड़ देते है। कई युवको के खेतों में मिनरल का खनन होता है तो वे अपने काम में लग जाते है।


श्रम, रोजगार व जिला उद्योग केन्द्र की ओर से हर साल रोजगार मेले होते है। इसमें सैकड़ों युवक नौकरी के लिए आवेदन करते है, लेकिन नौकरी पर 5 प्रतिशत लोग भी नहीं पहुंचते है। क्योंकि वे ऑफिस में बैठकर काम करना ज्यादा पसंद करते है ना की मजदूरी करना।
रोजगार का सबसे बड़ा साधन गुजरात व महाराष्ट्र में आइसक्रीम की लॉरी लगाने है। जिले के हजारों युवक जिनकी उम्र 18 से 25 साल है वे इस काम धन्धे में लगे हुए है। इसके चलते भी उद्योगो में मजदूरी करना पसंद नहीं करते है।

उद्योग संख्या श्रमिक
स्पिनिंग 18 35000
प्रोसेस 19 7000
वीविंग 475 40000

बड़ी खबरें

View All

भीलवाड़ा

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग