
आरटीई प्रवेश: पोर्टल ठप होने से अटकी सुनवाई, शिक्षा निदेशालय ने बढ़ाई मोहलत
भीलवाड़ा जिले में शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश की राह देख रहे हजारों अभिभावकों के लिए राहत भरी खबर है। आरटीई पोर्टल में आई तकनीकी खामी और इसके नहीं खुलने के कारण सीबीईओ स्तर पर अटकी जनसुनवाई को देखते हुए शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। प्रारम्भिक शिक्षा निदेशालय ने प्रथम चरण के आवंटन से संबंधित परिवेदनाओं के निस्तारण की समय सीमा 2 अप्रेल से बढ़ाकर अब 6 अप्रेल कर दी है।
शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए आरटीई के तहत आवेदन करने वाले अभिभावकों की शिकायतें सीबीईओ स्तर पर लंबित थीं। बताया जा रहा है कि आरटीई पोर्टल के सर्वर में दिक्कत आने और साइट के नहीं खुलने के कारण इन परिवेदनाओं की सुनवाई नहीं हो पा रही थी। समय सीमा नजदीक आने के कारण अभिभावकों में प्रवेश प्रक्रिया से बाहर होने का डर और असमंजस की स्थिति बनी हुई थी।
स्थिति को गंभीरता से लेते हुए प्रारम्भिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने गुरुवार को नए दिशा-निर्देश जारी किए। इसके अनुसार, राज्य के गैर सरकारी विद्यालयों में निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12 (1)(ग) के तहत पूर्व में जारी टाइम फ्रेम में बदलाव किया गया है। प्रथम चरण के आवंटन से जुड़ी परिवेदनाओं के निस्तारण की अंतिम तिथि जो पहले 2 अप्रेल निर्धारित थी, उसे बढ़ाकर 6 अप्रेल कर दिया गया है। विभाग के इस फैसले से जिले के उन हजारों अभिभावकों ने बड़ी राहत की सांस ली है, जो तकनीकी खामी के चलते अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित थे। अब वे अपनी शिकायतें और जरूरी दस्तावेज बिना किसी सर्वर की जल्दबाजी के सीबीईओ के समक्ष प्रस्तुत कर सकेंगे। सीबीईओ को भी अब प्रत्येक आवेदन और शिकायत की बारीकी से जांच कर न्यायसंगत निस्तारण करने के लिए पर्याप्त समय मिल गया है। इससे पूरी प्रवेश प्रक्रिया में किसी भी योग्य छात्र के वंचित रहने की संभावना कम हो जाएगी।
Published on:
03 Apr 2026 09:06 am
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