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प्रदूषण पर तीसरी आंख का पहरा: अब एक क्लिक पर पकड़ी जाएगी प्रोसेस व डाई हाउस की चोरी

आरपीसीबी ने उद्योगों के कैमरों को ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ा, दफ्तर में बैठकर होगी एमईई और आरओ की लाइव मॉनिटरिंग

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Pollution Under the Watchful Eye: Evasion by Processing and Dyeing Units to Be Detected with Just a Click

प्रदूषण पर तीसरी आंख का पहरा: अब एक क्लिक पर पकड़ी जाएगी प्रोसेस व डाई हाउस की चोरी

भीलवाड़ा शहर में प्रदूषण फैलाने वाले और चोरी-छिपे गुवारड़ी नाले में केमिकल युक्त जहरीला पानी छोड़ने वाले उद्योगों की अब खैर नहीं है। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (आरपीसीबी) ने इनकी मनमानी पर नकेल कसने के लिए एक हाईटेक प्रोजेक्ट तैयार किया है। अब अधिकारी अपने कार्यालय में बैठकर महज एक क्लिक से यह देख सकेंगे कि कौन सा उद्योग अपने यहां एमईई और आरओ प्लांट चला रहा है और कौन सा नहीं।

यूं पकड़ी जाएगी प्रदूषण की चोरी

लंबे समय से यह शिकायतें आ रही थीं कि कई प्रोसेस और डाई हाउस अपना खर्च बचाने के लिए एमईई और आरओ का संचालन नहीं करते हैं। इसके बजाय वे दूषित और केमिकल युक्त पानी को रात के अंधेरे में या चोरी-छिपे सीधे गुवारड़ी नाले अथवा खाली जमीनों, बनास नदी, टैक्टरट्रोली के माध्यम से बरसाती नालों में छोड़ देते हैं। पर्यावरण को हो रहे इस नुकसान पर अंकुश लगाने के लिए आरपीसीबी ने इन उद्योगों में लगे हाई क्वालिटी कैमरों को सीधे अपने ऑनलाइन सिस्टम से लिंक कर लिया है।

शिकायत मिलते ही होगी ऑन द स्पॉट चेकिंग

इस नई तकनीकी व्यवस्था के बाद, आरपीसीबी का काम बेहद त्वरित और पारदर्शी हो गया है। अब किसी भी प्रोसेस या डाई हाउस की शिकायत मिलने पर अधिकारियों को मौके पर जाने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वे तुरंत अपने कंप्यूटर मॉनिटर पर उस इकाई के कैमरों का लाइव फीड खोल सकेंगे। यदि कैमरे में यह स्पष्ट हो जाता है कि मशीनों का संचालन नहीं हो रहा है, तो बिना किसी देरी के संबंधित उद्योग को नोटिस जारी कर सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

हर फैक्ट्री के कैमरे कंट्रोल रूम से जुड़े

उद्योगों की ओर से दूषित पानी छोड़े जाने की घटनाओं को रोकने के लिए कैमरों को हमारे ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ा गया है। हर प्रोसेस हाउस में लगे एमईई व एजिटेटेडथिन फिल्म ड्रायर पर लगे कैमरों को एक साथ लिंक किया गया है। इससे हम कार्यालय से ही यह सुनिश्चित कर सकेंगे कि ट्रीटमेंट प्लांट, एमईई या आरओ सही से काम कर रहे हैं या नहीं।

- दीपक धनेटवाल, क्षेत्रीय अधिकारी, आरपीसीबी भीलवाड़ा