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कम्प्यूटर के साथ बही खातों का चलन

भीलवाड़ा. कम्प्यूटर के युग में व्यापारी भले ग्राहकों को कम्प्यूटराइज्ड बिल देने के साथ ही अपना हिसाब-किताब हार्ड ***** में सुरक्षित रखते हैं, लेकिन व्यापारी वर्ग में बही-खाते का क्रेज कम नहीं हुआ है।

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कम्प्यूटर के साथ बही खातों का चलन

कम्प्यूटर के साथ बही खातों का चलन

भीलवाड़ा. कम्प्यूटर के युग में व्यापारी भले ग्राहकों को कम्प्यूटराइज्ड बिल देने के साथ ही अपना हिसाब-किताब हार्ड में सुरक्षित रखते हैं, लेकिन व्यापारी वर्ग में बही-खाते का क्रेज कम नहीं हुआ है। युवा व्यापारी पेपरलैस काम में विश्वास रखते हैं, लेकिन पुराने व्यापारी आज भी बही में हिसाब-किताब लिखते हैं। दीपावली पर बही-खाते का पूजन कर नई बहियां डालने की तैयारी चल रही है।


व्यापार छोटा हो या बड़ा बदले जमाने के इस दौर में हर जगह कम्प्यूटर प्रणाली ने तेजी से कदम जमा लिए हैं। जीएसटी लागू होने के बाद हर धंधे में कम्प्यूटर का काम बढ़ा है। व्यापारी लेन-देन से लेकर माल के स्टॉक तय का ब्योरा कम्प्यूटर में रखने लगे हैं। समय की बचत और काम की आसानी से कम्प्यूटर ने व्यापारी वर्ग को आकर्षित किया है। आजकल तो कई तरह के वर्जन आने से व्यापारियों ने मोबाइल में अपने व्यापार का हिसाब रखना शुरू कर दिया है।

लक्ष्मी के साथ पूजन
दुकानदार हो या कोई अन्य व्यवसायी कम्प्यूटर के साथ बही खातों का उपयोग कर रहा है। व्यापारी वर्ग में बही-खाते को इतनी इज्जत दी जाती है। लक्ष्मी पूजन के दौरान बही- खाते का भी पूजन कर स्वास्तिक बनाकर नया हिसाब लिखा जाता है। बही खाते में व्यापारी के पास पुराना हिसाब दर्ज हैं। जिले के ऐसे व्यापारी जो बही-खाते का उपयोग करते हैं, उनके पास आज भी कई वर्षों के लेनदेन बहियों में लिखे हुए हैं। कई व्यापारी तो ऐसे हैं जिनके पास कई पीढ़ियों के बही-खाते आज भी सुरक्षित हैं।

बही का ही मान्य

बही-खातों में बड़ी संख्या में खरीद धनतेरस पर शुभ मुहूर्त में होती है। कई व्यापारी इस दिन होने वाली खरीदारी का हिसाब किताब लिखकर बही-खाते की शुरुआत करते हैं। बही में एक बार जो उधारी या चुकता राशि दर्ज हो जाए वह अब भी मान्य है। उसके लिए व्यापारी वर्ग किसी सबूत की आवश्यकता नहीं मानता।