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32 साल से परिंदो की खिदमत कर रहे साजन, कब्रिस्तान में करते दाना-पानी का इंतजाम

पठान के इर्दगिर्द बेखौफ घूमते हैं पक्षी: पक्षियों ने एक बार सांप से बचाई थी इनकी जान

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Sajan serving birds in bhilwara

Sajan serving birds in bhilwara,Sajan serving birds in bhilwara

भीलवाड़ा।

परिंदो के प्रति बेपनाह मोहब्बत का दूसरा नाम है साजन खां पठान। सोरगरों की गली में रहने वाले 68 साल के साजन खां तीन दशक से अधिक समय से पङ्क्षरदों की लगातार खिदमत कर रहे हैं। साजन बीते 32 साल से कब्रिस्तान में पक्षियों के लिए पङ्क्षरडे लगा रहे हैं। अब तक 15 हजार से अधिक परिंंडे लगा चुके हैं। साजन बा के नाम से मशहूर पठान परिंदों के नियमित दाना पानी की व्यवस्था कर रहे हैं।

पहले वे यह काम अकेले कर रहे थे, लेकिन लोगों ने उन्हें परिंदों की सेवा करते देखा तो वे भी उनके साथ हो लिए। पठान की प्रेरणा से दूसरे लोग भी परिंडे व दाना उपलब्ध कराने लगे। साजन रोजाना पर‍िंडों को धोकर उनमें साफ पानी भरते हैं। उनके इस काम में अब बाबूभाई फौजदार, मुंबई आंतकी हमले में शहीद जहीन के पिता मतुद्दीन शेख व रफीक मोहम्मद आदि मदद करते हैं। ये पठान को पर‍िंडे आदि उपलब्ध कराते हैं। साजन बा परिंडों में पानी डालने को दिनचर्या का हिस्सा बना चुके हैं।


पहचानने लगे पक्षी
कब्रिस्तान में रोज दाना पानी डालते रहने से पठान को पक्षी अच्छे से पहचानने लगे हैं। जब वे परिंडों में पानी भरते हैं तो पक्षी आसपास आ जाते हैं। दूसरा कोई पानी या दाना डालता है तो पक्षी उड़ जाते हैं।


साइकिल से लाए कैन
साजन बा का कहना है कि कई बार वे साइकिल पर कैन रख पानी लाए। एक-एक पङ्क्षरडे को साफ कर पानी डाला। इससे आत्मिक शांति मिलती है। दूसरे लोग भी परिंदों की सेवा को प्रेरित होते हैं।


पक्षियों ने दी खतरे की सूचना
साजन बताते हैं एक बार पक्षियों को दाना-पानी डाल रहे थे तो काला सांप पीछे से आया। मुझे इसका अंदाजा भी नहीं था। सांप देख पक्षी जोर-जोर से आवाज निकालने लगे। मैंने पीछे देखा तो काला सांप था। पक्षियों ने कॉल कर मेरी जान बचाई। पशु-पक्षी संवेदनशील होते हैं जो हमें किसी भी खतरे से आगाह करते हैं।


नेवले को पेस्ट्री व क्रीम रोल तो कौओं को बिस्किट पसंद
साजन को पङ्क्षरडों में पानी डालता देख वर्ष 2008 से बाबू फौजदार भी इस नेक काम में मदद करने लगे। वे परिंदों के लिए नियमित पेस्ट्री, केक, क्रीम रोल, बिस्किट, कुरकुरे, बाजरा, चावल व दाल आदि डालते हैं। उनका कहना है कि नेवले को पेस्ट्री व क्रीम रोल पसंद है तो कौओं को बिस्किट भाता है। कौए बिस्किट को चोंच में पकड़कर पहले पानी में डालते हैं जब बिस्किट गल जाता है तो इत्मीनान से खाते हैं। अपने बच्चों को खिलाते हैं जबकि चिडिय़ा, कबूतर, टिटोड़ी को बाजरा, चावल व दाल पसंद है।


जब तक है जान, करता रहूंगा सेवा के काम
जब तक हाथ पैरों में जान रहेगी, तब तक वे परिंदोंकी सेवा करूंगा। मेरे इस कार्य में परिवार भी मदद करता है। परिदों की सेवा के लिए कई बार शादी समारोह तक छोड चुका हूं।
साजन खां पठान, समाजसेवी