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भीलवाड़ा में सरस घी की किल्लत, बढ़ी मांग के बीच बाजार में कालाबाजारी, शादी सीजन में उपभोक्ता परेशान

- डेयरी में स्टॉक खत्म, 8 टन उत्पादन के बावजूद मांग दोगुनी - कुछ व्यापारी 1200 से 1500 रुपए तक अधिक दाम वसूल रहे

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Shortage of mustard oil in Bhilwara

Shortage of mustard oil in Bhilwara

भीलवाड़ा जिले में इन दिनों सरस घी की भारी कमी के चलते उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सावों के सीजन की शुरुआत के साथ ही शादी-विवाह और धार्मिक आयोजनों में घी की मांग कई गुना बढ़ गई है। वहीं, सरस डेयरी प्लांट का स्टॉक खत्म होने से बाजार में घी की आपूर्ति प्रभावित हो गई है।

मांग बढ़ी, आपूर्ति घटी, कालाबाजारी बढ़ी

शहर के व्यापारियों ने बताया कि सरस डेयरी से मांग के अनुरूप घी की सप्लाई नहीं हो पा रही है। ऐसे में कुछ व्यापारी बाहर से घी लाकर सरस ब्रांड के नाम पर ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं। सरस घी के 15 किलो के टिन की कीमत 9045 रुपये निर्धारित है, लेकिन कुछ व्यापारी वही टिन 10,500 रुपए तक बेच रहे हैं। यानी एक टिन पर 1200 से 1500 रुपये तक अधिक वसूले जा रहे हैं।

डेयरी में प्रतिदिन 8 टन उत्पादन, उतनी ही खपत

भीलवाड़ा डेयरी के विपणन अधिकारी टी. पाटीदार ने बताया कि डेयरी प्लांट में प्रतिदिन लगभग 8 टन सरस घी का उत्पादन हो रहा है और उतनी ही मात्रा में घी बाजार में वितरित किया जा रहा, लेकिन सीजन के कारण मांग में अचानक वृद्धि से आपूर्ति कम पड़ी है। उन्होंने बताया कि राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (आरसीडीएफ) ने सरस घी की दरों में कोई बदलाव नहीं किया जबकि अन्य निजी कंपनियों ने दाम बढ़ा दिए हैं। इससे उपभोक्ता सरस घी को प्राथमिकता दे रहे हैं।

निर्धारित रेट से अधिक वसूला तो होगी कार्रवाई

पाटीदार ने स्पष्ट किया कि डेयरी का कोई भी डिस्ट्रीब्यूटर या व्यापारी निर्धारित दर से अधिक मूल्य नहीं वसूल सकता। यदि कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरस घी की लोकप्रियता और सस्ते दामों के कारण इसकी मांग बढ़ी है, लेकिन डेयरी लगातार उत्पादन और वितरण बढ़ाने के प्रयास में है ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।

जीएसटी घटा, फिर भी कंपनियों ने बढ़ाए दाम

केंद्र सरकार ने हाल ही में घी पर जीएसटी दरों में कमी की घोषणा की थी। इससे कीमतों में कमी की उम्मीद थी। लेकिन अधिकांश निजी घी कंपनियों ने अपने दाम बढ़ा दिए, इससे सरस घी अन्य ब्रांड से सस्ता हो गया। नवंबर माह में सावों के आगमन के साथ शादी समारोहों और धार्मिक आयोजनों में घी की खपत कई गुना बढ़ी है। ऐसे में सरस घी की कमी से न केवल उपभोक्ता बल्कि मिठाई और भोजन व्यवसाय से जुड़े लोग भी प्रभावित हो रहे।