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school crime शिक्षा से होते जा रहे दूर, वर्चस्व में पनप रहा अपराध

कहते है स्कूल भविष्य की इबारत लिखने की पहली सीढ़ी है। यहीं इबारत की दीवार मजबूत हो तो भविष्य संवरता है। शिक्षा के मंदिर में पढ़ाई की जगह आने वाले भविष्य के कुछ बच्चे अपराध की इबारत भी लिख रहे हैं। यह महज उदाहरण है। सच्चाई है कि बदलते दौर के साथ अपना वर्चस्व दिखाने के लिए स्कूल से गैंग पनप रही है। इसमें वे बच्चे शामिल हो रहे जो शिक्षा से दूर हो रहे हैं
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भीलवाड़ा

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Akash Mathur

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Updated: 15 Jun 2022, 11:53 AM IST

Moving away from education, crime flourishing in dominatio

Moving away from education, crime flourishing in dominatio

school crime कहते है स्कूल भविष्य की इबारत लिखने की पहली सीढ़ी है। यहीं इबारत की दीवार मजबूत हो तो भविष्य संवरता है। शिक्षा के मंदिर में पढ़ाई की जगह आने वाले भविष्य के कुछ बच्चे अपराध की इबारत भी लिख रहे हैं। यह महज उदाहरण है। सच्चाई है कि बदलते दौर के साथ अपना वर्चस्व दिखाने के लिए स्कूल से गैंग पनप रही है। इसमें वे बच्चे शामिल हो रहे जो शिक्षा से दूर हो रहे हैं। इनकी उम्र 15 से 17 वर्ष है। गलत संगत और पढ़ाई से जी चुराने के कारण अपराध का रास्ता पकड़ रहे हैं। पुलिस ने पिछले दो साल में ही तीस बाल अपचारियों को अलग-अलग मामलों में निरूद्ध किया।school crime

गैंग बनाकर झगड़े फसाद से अपराध की पहला पायदान चढ़ते हैं। उसके बाद संगीन वारदात से नहीं चूकते। इससे पुलिस के लिए नई मुश्किल खड़ी हो गई है। राजस्थान पत्रिका इसी मुद्दे को लेकर बच्चों को बचाओ अभियान शुरू कर रहा है। इसमें बच्चों के अपराध का रास्ता पकड़ने के कारण, स्कूलों की जिम्मेदारी और बुरी संगत से बचाव को श्रृंखलाबद्ध प्रकाशित करेगा।


कागज पर काउंसलिंग, नजर नहीं रखी जाती
स्कूलों में बच्चों के साथ काउंसलिंग कागजों पर ही सिमटी है। जो बच्चे गलत संगत में जा रहे हैं, उनके साथ हर माह प्रधानाचार्य विशेषज्ञों को बुलाकर काउंसलिंग करते हैं लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। पाठ्यक्रम पूरा कराने पर ही जोर रहता है। सरकारी विद्यालयों में बच्चों पर पूरी तरह से नजर तक नहीं रखी जाती। मध्यांतर में बच्चे भाग जाते है तो कक्षाकक्ष में पढ़ाई पर ध्यान नहीं देतेे।

दादा बनने की होड़, इसलिए बदलता व्यवहार
जैसे-जैसे बच्चे उम्र की सीढि़यां चढते वैसे उनके व्यवहार में परिवर्तन आने लगता है। आधुनिकता की हवा लगने से कई स्कूली बच्चे अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए कुछ साथियों को शामिल कर गैंग बना लेते है। गैंग में अपने को बड़ा दिखाने के लिए झगड़ते हैं। यह मारपीट का रूप लेकर संगीन अपराध तक में धकेल देता है।

विवेक की कमी
किशोर उम्र के बच्चों में विवेक नहीं होता। अच्छे और बुरे की पूरी तरह से समझ नहीं होती है। स्कूल में बड़ा नेता बनने की होड़ में सीमाएं लांघ जाते हैं। राजनीति, गैंगस्टर और जातिवाद भी बच्चों को अपराध की ओर ले जाने का मुख्य कारण है। विद्यालय में शिक्षक भी आदर्श स्थापित नहीं कर पा रहे हैं।
- सुमन त्रिवेदी, पूर्व अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति


केस-01

सुभाषनगर इलाके के राजकीय विद्यालय के बाहर परीक्षा देकर लौटे छात्र पर घात लगाए बैठे कुछ लोगों ने हमला किया। हमले में छात्र को चोटें आई। सुभाषनगर पुलिस तह तक गई तो स्कूल के कुछ बच्चों का हाथ सामने आया। वर्चस्व की लड़ाई में बाहर के कुछ साथियों की मदद से हमला कराया। पुलिस ने बाल अपचारियों को निरूद्ध भी किया।

केस-2
नगर परिषद के निकट सरकारी विद्यालय परिसर में दो छात्र गुटों में झगड़ा हुआ। झगड़ा इतना बढ़ा कि एक गुट ने बाहर के साथियों को बुला लिया। दोनों गुटाें में मारपीट हुई। मामला कोतवाली तक पहुंचा। पुलिस ने जांच की तो सामने आया कि दोनों गुट एक-दूसरे को नीचा दिखाने के चक्कर में रंजिश पाल बैठे।