ममता ने बताया कि गांव में दादी, परिवारजनों को हाथ से गोबर व अन्य कचरा उठाते देखा था, जिससे उसने बिना हाथों को गंदा किए और सिर पर वजन नहीं उठाने के बारे में सोचा। पिता और परिजनों ने ममता का सहयोग कर आत्मविश्वास भी बढ़ाया। जिससे ममता ने अनुसंधान कर एक मॉडल तैयार कर इंस्पायर अवार्ड मानक में प्रदर्शित किया। जिसके तहत ममता का चयन अब जापान जाने के लिए किया गया है। छात्रा ममता मूलत: अजमेर जिले के केकडी के पास सापला निवासी है, उसके पिता घीसालाल एक सीमेंट फैक्ट्री में मैनेजर के पद पर कार्यरत है।