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दुनिया में बज रहा भीलवाड़ा के स्केटर्स का डंका

भीलवाड़ा से राष्ट्रीय स्तर पर 300 से ज्यादा रोल बॉल खिलाड़ी खेल चुके

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भीलवाड़ा के खेल प्रशिक्षक डॉ.हिम्मत सिंह कानावत

भीलवाड़ा।
पहियों के सहारे कोई दौड़ सकता है? चलो दौड़ लिया तो कोई नहीं, लेकिन इन पर खेल भी सकता है, दो दशक पहले भीलवाड़ा के खेल प्रशिक्षक डॉ.हिम्मत सिंह कानावत के जेहन में यही विचार आया था। उन्होंने भीलवाड़ा शहर के नन्हे बच्चों को इसी तरह का नया खेल खिलाने व सिखाने की ठानी। ये खेल जो स्केटिंग के नाम से जाना- पहचाना जाता है, उसे सीखाने में लग गए। कुछ बच्चों को साथ लेकर खुली सड़क पर उतरे। उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और भीलवाड़ा ही नहीं वरन राजस्थान ने एेसे कई खिलाड़ी स्केटर बना दिए जो राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर से पदक लाए।

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इसी सपने को साकार करने के लिए कानावत ने 19 जुलाई 2004 को आरसी व्यास नगर की नवजीवन पब्लिक स्कूल के बैडमिंटन कोर्ट पर अंशुल को लेकर स्केटिंग शुरू की। अंशुल को निखार कर बाहर रोड पर स्केटिंग कराई। कई बच्चे व बड़े जुड़ गए। इनमें अनुवेश, जय गोयल और गौरव पहले राज्य के स्केटिंग खिलाडी बने। 2005 में राष्ट्रीय कोच रमेश सिंह ने कानावत को एक पहिए के नए खेल के बारे में बताये आज रोलबॉल के नाम से जाना जाता है। पहली बार भीलवाड़ा में राष्ट्रीय प्रतियोगिता 7 से 9 अगस्त 2008 को हुई। फिर कानावत की जिम्मेदारी बढ़ती गई और वो प्रदेश के खेल संघों में चुने गए।

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भीलवाड़ा से पहला अन्तर्राष्ट्रीय खिलाड़ी अंशुल विजयवर्गीय रहा। अंशुल ने साउथ एशियन चैम्पियनशिप ढ़ाका (बांग्लादेश) में विजेता भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। 27 मई से 30 मई 2016 तक कोलम्बो (श्रीलंका) में इनविटेशन में भीलवाड़ा के अमन ठठेरा व प्रतीक कालिया विजेता बने। चौथा विश्वकप 14 से 24 फ रवरी 2017 ढ़ाका (बांग्लादेश) में हुआ। उसमें राजलक्ष्मी नायक विजेता भारतीय टीम की सदस्य थी।


भीलवाड़ा से राष्ट्रीय स्तर पर 300 से ज्यादा रोल बॉल खिलाड़ी खेल चुके है। नमन चौधरी ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत को पदक दिलाए। नए खिलाडि़यों में निकिता प्रजापत, मानविका राणावत, कृति वर्मा, संस्कृति चित्रचार, अकरम खान अच्छे प्रदर्शन से भारतीय टीम के दरवाजे पर दस्तक दे रहे है। रोलबॉल के अभी तक सभी विश्व कप में कानावत रेफ री रहे। वे तृतीय विश्व कप 4 से 20 दिसम्बर 2015 पुणे (महाराष्ट्र) में तकनीकी निर्देशक थे। कानावत की पीड़ा है कि भीलवाड़ा में 1000 से अधिक छात्र-छात्राएं स्केटिंग करते है लेकिन देश में नाम चमकाने के बावजूद यहां रोलबॉल केलिए मैदान नहीं है। यहां स्केटिंग रिंग भी नहीं है।