
Spinning mills could not do three months stock due to increasei prices
जयप्रकाश सिंह
भीलवाड़ा। इस साल प्राकृतिक आपदा और कीट के प्रकोप के चलते दुनिया भर में कपास का उत्पादन कम हुआ है। दो साल बाद कोरोना का असर कम होने से विदेशों में कपास के साथ सूती धागे की मांग बढऩे से इनके दाम में जबरदस्त तेजी आ गई है। कपास का भाव पिछले साल के मुकाबले दोगुना है, वहीं सूती धागे की कीमतों में खासी बढ़ोतरी हो गई है। कपास का भाव पिछले साल साढ़े पांच हजार से 6 हजार रुपए प्रति क्विंटल था, जो इस बार बढ़कर 12 हजार रुपए क्विंटल तक पहुंच गया है। पहले सूती धागा 180 से 190 रुपए प्रति किलोग्राम मिल रहा था, वह अब 230 से 280 रुपए प्रति किलोग्राम हो गया है। सूती धागे के साथ अन्य कई तरह के धागे में भी तेजी बनी हुई है। ऐसे में सभी तरह के कपड़ों की कीमतों में बढ़ोतरी हो गया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक इस बार प्राकृतिक आपदा और कीट के प्रकोप के कारण भारत, अमरीका समेत दुनिया के कई देशों में कपास की फसलों को बहुत नुकसान हुआ। इस कारण इसका उत्पादन प्रभावित हुआ । ऐसे में कपास के भाव पिछले साल के मुकाबले दोगुने हो गए। सूती मिलों को पिछले साल 45 से 55 हजार में एक खण्डी [355.620 किलोग्राम] कपास मिल जाता था, अब वह 95 हजार से 1 लाख दस हजार रुपए में मिल रहा है। ऐसे में सूती धागा तैयार करने वाली मिलों में इसकी लागत भी काफी बढ़ गई है।
यहां होता है कपास का उत्पादन
राजस्थान में सबसे ज्यादा कपास का उत्पादन भीलवाड़ा, अलवर, जोधपुर, पाली, श्रीगंगानर और हनुमानगढ़ में होता है। राजस्थान के अलावा हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में भी कपास की पैदावार होती है। देश में सबसे ज्यादा कपास महाराष्ट्र में होता है, लेकिन पिछले साल अतिवृष्टि के कारण महाराष्ट्र और पंजाब में कपास की फसल को नुकसान हुआ। राजस्थान में इस बार 27 से 28 लाख गांठ कपास का उत्पादन हुआ है। एक गांठ में 170 किलो कपास आती है।
भीलवाड़ा से 23 सौ करोड़ का निर्यात
भीलवाड़ा में आधा दर्जन औद्योगिक इकाइयां सूती धागे का उत्पादन कर रही है। इन मिलों में हर साल दो से ढाई लाख टन सूती धागे का उत्पादन होता है। इन सभी इकाइयों से करीब 23 सौ करोड़ रुपए के धागे का विदेशों में निर्यात हो रहा है। उद्यमियों के अनुसार भारत से दुनिया के तीन दर्जन से ज्यादा देशों में कॉटन और सूती धागे का निर्यात बढ़ा है। चीन, जापान, इण्डोनेशिया, इटली, टर्की, इजिप्ट, दक्षिण कोरिया, वेनेजुएला, पेरु, बांग्लादेश, मोरक्को, हॉंगकॉंग, ब्राजील, पोलेण्ड समेत करीब 40 देशों में सूती धागे की मांग बढ़ी है। इसके कारण सूती धागे के दाम में भी उछाल आया है।
80 लाख गांठ का निर्यात, आयात शुल्क हटाया
पिछले साल के मुकाबले इस साल देश से कपास का निर्यात बढ़ा है। वर्ष 2020-21 में 54.83 लाख गांठ का निर्यात हुआ था, वही इस साल अब तक 80 लाख गांठ का निर्यात हो चुका है। जानकारों के अनुसार मांग होने से इस बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कपास के भाव बहुत तेज है। चीन भी इस बार बड़ी मात्रा में कपास आयात कर रहा है। भारत में भी कोरोना प्रतिबंध हटने के बाद कपड़ा उद्योगों में कपास और सूती धागे की भारी मांग आई है। सरकार ने दामों पर नियंत्रण के लिए कपास पर से आयात शुल्क को हटाया है।
नहीं मिला लाभ
हम जनवरी-फरवरी में कपास पर से आयात शुल्क हटाने की मांग कर रहे थे। सरकार ने इस मांग को स्वीकार तो किया, लेकिन कपास का सीजन निकलने के बाद गत 14 अप्रेल को आदेश जारी किए। अब कपास पर 30 सितंबर तक आयात शुल्क हटाने के आदेश दिए है। अभी तक कपास के आयात पर 11 फीसदी टैक्स लगता था, इसमें पांच फीसदी बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5 फीसदी एग्रो इंफ्रा डवलपमेंट सेस था। कपास पर शुल्क हटा लेने से टेक्सटाइल चेन, यार्न, फैब्रिक, गारमेंट्स को फायदा होता, लेकिन इसकी देरी से घोषणा होने से लाभ नहीं मिल रहा।
आर.के.जैन, महासचिव मेवाड़ चेम्बर ऑफ कामर्स एण्ड इंडस्ट्रीज
दाम तेज होने से नहीं कर सके स्टॉक
हर स्पिनिंग मिलें कपास का सीजन समाप्त होने से पहले ही मार्च व अप्रेल में तीन माह का स्टॉक जमा कर लेती है। इसके बाद भी हर माह कपास की खरीद होती रहती है, लेकिन इस बार दाम में तेजी व कपास की कमी को देखते हुए किसी ने स्टॉक नहीं किया है।
- बी.एम.शर्मा, सह प्रबंध निदेशक, आरएसडब्ल्यूएम
प्राकृतिक आपदा का असर
'' इस बार प्राकृतिक आपदा और कीड़े के प्रकोप के कारण पूरी दुनिया में कपास का उत्पादन कम हुआ है। ऐसे में कपास की कीमतों में बहुत बढ़ोतरी हुई । भीलवाड़ा में इस बार कपास की औसत उपज अच्छी है।
- पुरूषोत्तम शर्मा, कपास विशेषज्ञ
Published on:
27 Apr 2022 11:19 am
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