8 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

महंगाई और रूस-यूक्रेन लड़ाई से पत्थर व्यवसाय मंदा

व्यवसायियों व मजदूरों के सामने आर्थिक संकट
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भीलवाड़ा

•

image

Tej Narayan Sharma

•

Updated: 15 Jul 2022, 3:34 AM IST

stone business slow in bhilwara

stone business slow in bhilwara


बिजौलियां।

खनन क्षेत्र में पत्थर व्यवसाय में आई मंदी से व्यसायियों के अलावा मजदूर वर्ग को भी आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। इसका असर दूसरे व्यवसाय पर भी पड़ा है। आज श्रमिक किसी खदान या पत्थर स्टॉक पर मजदूरी मांगने जाते हैं तो पत्थर व्यवसायी उन्हें माल की बिक्री न होने का हवाला देकर उन्हें रोजगार नहीं दे पा रहे हैं। कई जगह तो पत्थर की फैक्ट्रियों में मजदूरों की संख्या कम कर दी है। कई जगह मुनीमों तक को भी हटा दिया गया है।

माल का उठाव नहीं होने से खदानों में भारी मात्रा में पत्थरों के ढेर लगे हैं। पत्थर स्टॉक पर भी काफी मात्रा में माल पड़ा है। आगे से इनकी मांग नहीं होने से खरीदार नहीं है। पत्थर व्यवसायियों का तो यहां तक कहना है कि उन्होंने ऐसी मंदी कभी देखी जब अच्छी क्वालिटी का पत्थर भी कोई लेने वाला कोई नहीं है। उन्होंने ऊंचे दाम पर अच्छी क्वालिटी का पत्थर खरीदा है और उसकी बिक्री न होने से खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है। यह मंदी विदेशी निर्यात के अलावा स्थानीय स्तर पर भी दिख रही है।


20 हजार ट्रक माल का कोई खरीदार नहीं
क्षेत्र के नया नगर, खड़ीपुर, सुखपुरा, भूति, सदारामजी का खेड़ा, उदपुरिया, चंपापुर, तिलस्वां, सतपुडिय़ा आदि खनन क्षेत्रों में आज भी करीब 20 हजार से अधिक ट्रक माल पड़ा हुआ है। इसका कोई खरीदार नहीं है। मंदी की मार के कारण हजारों की संख्या में श्रमिक वर्ग व खनन क्षेत्र में काम करने वाले वाहनों के चालक, हैल्पर, बेलदार, हमाल आदि बेरोजगार हो गए हैं। अब इनके पास कोई काम नहीं है।


खड़े हुए वाहन, कई पत्थर मशीनें बंद
खदानों में काम आने वाले वाहनों को खड़े कर दिए हैं। क्षेत्र में कई पत्थर कङ्क्षटग मशीनें बंद हो गई है। जो चल रही है वह भी एक शिफ्ट में चल रही है। रीको एरिया में काम करने वाली बड़ी पत्थर की फर्मों ने भी अपने मजदूरों की संख्या कम कर दी है। रॉयल्टी खनन संग्रहण ठेकेदार जितेंद्र ङ्क्षसह का कहना है कि मंदी के कारण जहां रोजाना 100 कंटेनर निकलते थे आज इनकी संख्या महज चार-पांच तक रह गई है।


फैक्ट फाइल
बिजौलियां खनन क्षेत्र
120 खनिज बाउंड्री
2000 क्वारी लाइसेंस
150 खातेदारी क्वारी लाइसेंस
15000 श्रमिक खनन क्षेत्र में
5000 श्रमिक कटर मशीन व स्टॉक पर


कंटेनर का भाड़ा बढऩे, रूस यूक्रेन युद्ध व महंगाई बढऩे का इस व्यवसाय पर काफी गहरा असर पड़ा है। आगे खरीदार नहीं होने माल का उठाव नहीं हो पा रहा है।
- सुनील जैन, अध्यक्ष, ऊपर माल सैंड स्टोन एक्सपोर्ट एसोसिएशन


रीको एरिया में काम करते थे, लेकिन मंदी के चलते वहां से हटा दिया है। पत्थर का उत्पादन अधिक होने और माल का खरीदार नहीं होने से ऐसी स्थिति हुई है। कई जगह तो पत्थर सड़क के किनारे आबादी क्षेत्र में ढेर लगा दिए हैं।
- दुर्गालाल मीणा, मुनीम, चेनपुरिया

मुख्य रूप से रूस और यूक्रेन का युद्ध बंद होना जरूरी है। बंदरगाह पर कंटेनर का किराया बढ़ा है वह भी कम होने से इस मंदी में सुधार हो सकता है। साथ ही पत्थर व्यवसायी वर्ग द्वारा सैंड स्टोन के भाव पर भी नियंत्रण जरूरी है।
हर्ष कालानी, निर्यातक, सैंड स्टोन


सैंड स्टोन का विदेशी निर्यात रुकने के कारण केंद्र सरकार को विदेशी मुद्रा का भी नुकसान हो रहा है और इस पर गंभीरता से ध्यान देने से जीडीपी ग्रोथ बढ़ेगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेगे।
सीमा तिवारी, उपखंड अधिकारी